💥पति-पत्नी और उनके तीन मासूम बच्चों की मौत।
💥मृतक के दो बहन और जीजा को पुलिस ने किया गिरफ्तार।
तहतक न्यूज/ ग्रेटर नोएडा। पैतृक संपत्ति में अधिकार को लेकर लगभग हर परिवार में कुछ न कुछ विवाद के मामले आये दिन देखने व सुनने को मिल रहे हैं। कभी-कभी यह विवाद इतना तूल पकड़ लेता है कि परिवार में रिश्ते-नातों की कोई अहमियत नहीं रह जाती और सदस्य बेमौत मारे जाते हैं। ऐसे ही झकझोर देने वाली एक घटना में एक ही परिवार के पांच लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है। यह दुखद घटना 17 अक्टूबर 2026 की सुबह ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा थाना क्षेत्र के नगला श्रीपदम गांव में सामने आई।
मृतकों में 37 वर्षीय महेश, उसकी 35 वर्षीय पत्नी ललिता और उसके तीन मासूम बच्चे 11 वर्षीय लड्डू, 7 वर्षीय मिष्टी और 3 वर्षीय साक्षात शामिल हैं।

पहले यह माना जा रहा था कि परिवार रात में मेला देखकर लौटा और नूडल्स (मैगी) खाकर सो गया, जिसके बाद फूड पॉइजनिंग की वजह से उनकी मौत हो गई। पुलिस जाँच और पोस्टमार्टम में जहर के लक्षण मिलने के बाद मामला पूरी तरह बदल गया। पुलिस को मृतक महेश का एक वॉइस नोट (ऑडियो रिकॉर्डिंग) मिला है, जिसमें उसने संपत्ति विवाद को लेकर अपनी बहनों और जीजा पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। ललिता के भाई की शिकायत और वॉइस नोट के आधार पर, पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में महेश की दो बहनों और जीजा को गिरफ्तार कर लिया है।

डॉक्टरों के पैनल द्वारा किए गए पोस्टमार्टम में सभी पांचों शवों में जहरीले पदार्थ के लक्षण मिले हैं। डॉक्टरों के मुताबिक पोस्टमार्टम से मौत की एकदम सटीक वजह तुरंत साफ नहीं हो सकी है, जिसके कारण सभी मृतकों का विसरा सुरक्षित रखकर विधि विज्ञान प्रयोगशाला जाँच के लिए भेज दिया गया है। विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम तौर पर पुष्टि होगी कि उन्हें कौन सा जहर दिया गया था या उन्होंने खाया था।
तीन आरोपी गिरफ्तार
मृतक महेश के मोबाइल से मिले सुसाइड वॉइस नोट और मृतक के साले की लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने (धारा 108 BNS / पुराना 306 IPC) के तहत मुकदमा दर्ज कर महेश की दोनों बहनों सुनीता और सपना तथा एक बहनोई शेखर को गिरफ्तार कर लिया है।
10 बीघा जमीन और मकान का विवाद
ग्रामीणों और जाँच के अनुसार, पारिवारिक कलह की वजह संपत्ति थी। महेश की मां ने करीब 6 महीने पहले पैतृक मकान (जिसमें महेश अपने परिवार के साथ रह रहा था) को गुपचुप तरीके से अपनी बड़ी बेटी सुनीता के नाम ट्रांसफर कर दिया था। तीन महीने पहले जब सुनीता ने उस मकान में अपने नाम से बिजली का मीटर लगवाकर कब्जे का दावा किया, तब महेश को इस बात का पता चला। इसके बाद से महेश मानसिक रूप से काफी आहत और तनाव में था।
पुलिस अब इस तकनीक और वैज्ञानिक बिंदु पर जाँच कर रही है कि क्या यह सामूहिक आत्महत्या (जिसमें महेश ने तनाव में आकर पहले पूरे परिवार को जहर दिया और फिर खुद खा लिया) का मामला है, या फिर खाने (मैगी) में किसी बाहरी व्यक्ति या परिवार के ही किसी सदस्य द्वारा साजिश के तहत जहर मिलाया गया था। पुलिस ने घटनास्थल से भोजन और बर्तनों के सैंपल भी जांच के लिए जब्त किए हैं। हालांकि, इस संपत्ति विवाद और पांचों मौतों के बीच संबंध की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली गई। पुलिस के अनुसार, फुटेज में किसी बाहरी व्यक्ति के घर में प्रवेश करने की जानकारी नहीं मिली है. मौत की असल वजह का पता लगाने के लिए पुलिस पोस्टमार्टम और विसरा जाँच की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। इस हृदय विदारक घटना में बात करें तहतक की तो जब से बहनों को उनके मायके की संपत्ति में बराबर का अधिकार मिला है तब से जमीन व मकान के बंटवारे को लेकर अधिकतर परिवारों में मनमुटाव और विवाद की बातें देखने को मिल रही हैं। घर के मुखिया की मौत हो या भू-अर्जन में जमीन जाने और मुआवजे की बात हो, परिवार के सदस्यों के बीच अनबन व तनाव की स्थिति बढ़ने लगती है जो अंततः किसी खौफनाक घटना में बदल जाता है। ऐसी घटनायें स्वस्थ समाज के लिए बेहद ही गंभीर चिंता का विषय बन गया है।



