तहतक न्यूज/ मेरठ, उत्तरप्रदेश। मेरठ कोर्ट ने पिछले 3 दिनों के भीतर दो मामलों में कुल 4 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है, बता दें कि, बीते 14 अक्टूबर को एक अन्य बहुचर्चित नीले ड्रम वाले सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई गई थी और अब जिला अदालत ने सांप से कटवाकर पति की हत्या करने वाली पत्नी और उसके बॉयफ्रेंड को मौत की सजा (फांसी) सुनाई है।

मेरठ के एडीजे-12 कोर्ट के न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए इसे बेहद गंभीर मानते हुए अपना फैसला सुनाया। मृतक अमित कश्यप की पत्नी रविता और उसके बॉयफ्रेंड अमरदीप की मेरठ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई थी. महज 13 महीनों के भीतर कोर्ट द्वारा इस सनसनीखेज हत्या के मामले में बड़ा जजमेंट आने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है।

बहुचर्चित 'सांप कांड' में मुख्य आरोपी पत्नी रविता (24 वर्ष) और उसके प्रेमी अमरदीप (27 वर्ष) को फांसी की सजा सुनाते हुए अपर जिला जज (ADJ-12) जयवीर सिंह नागर की अदालत ने इस खौफनाक हत्याकांड को 'विरलतम से विरलतम अपराध' (Rare of the Rarest) की श्रेणी में माना और फैसला सुनाने के बाद पेन की निब तोड़ दी।

विदित हो कि, यह घटना 17 अप्रैल 2025 की रात को मेरठ के बहसुमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव में हुई थी। रविता ने अपने प्रेमी अमरदीप के साथ मिलकर अपने पति अमित कश्यप (25 वर्ष) की गला घोंटकर हत्या कर दी थी। हत्या को एक हादसा दिखाने के लिए उन्होंने अमित के बिस्तर पर एक जिंदा सांप छोड़ दिया, ताकि सबको लगे कि अमित की मौत सांप के डसने से हुई है। सुबह अमित का शव बिस्तर पर मिला और उसके शरीर पर करीब 10 निशान भी थे। अमित के परिजनों को जब शक हुआ और उन्होंने पोस्टमार्टम कराने की मांग की, तो रविता ने इसका कड़ा विरोध किया था। जब मौके पर मिले सांप को जाँचने के लिए एक सपेरे को बुलाया गया, तो उसने खुलासा किया कि वह सांप जहरीला नहीं था और उसके दांत भी टूटे हुए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ हो गया कि अमित के शरीर में कोई जहर नहीं था और उसकी मौत दम घुटने (गला दबाने) के कारण हुई थी।

इस मामले की सुनवाई करीब डेढ़ साल तक चली, जिसमें 87 तारीखें लगीं और 12 गवाहों की गवाही दर्ज की गई। पुलिस ने वारदात के 60 दिनों के भीतर ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। कोर्ट ने दोनों को 7 अक्टूबर 2026 को ही दोषी करार दिया था और 16 अक्टूबर 2026 को सजा का ऐलान किया। फैसला सुनाते हुए जज ने सती सावित्री और करवाचौथ के व्रत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जहाँ पत्नियां पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं, वहीं रविता ने प्रेमी के साथ मिलकर ऐसा जघन्य कृत्य किया जो माफी के काबिल नहीं है। कोर्ट ने कहा कि केवल शरीर के टुकड़े करना ही जघन्य अपराध नहीं होता, इन दोनों ने तो आत्माओं के टुकड़े किए हैं।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जेल से पेशी के दौरान जब दोनों को फांसी की सजा सुनाई गई, तो वे फूट-फूटकर रोने लगे। रविता ने रोते हुए कोर्ट से गुहार लगाई कि उसके तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं, उनका ख्याल रखा जाए। वहीं, अमरदीप ने कहा कि उसके माता-पिता बूढ़े हैं और उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है।
बहरहाल, कोर्ट के इस ऐतिहासिक निर्णय से जहाँ देश के आम नागरिकों में राहत और न्याय के प्रति विश्वास बढ़ा है वहीं, दोषियों के चेहरे पर मौत का खौफ स्पष्ट झलक रहा है। अब लोगों की निगाहें आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं, लेकिन एक सवाल लोगों के मन पर बार-बार उठने लगा है कि इन बेरहम कातिलों को फांसी पर आखिर कब लटकाया जायेगा?



