💥कुर्सी छोड़ जमीन पर बैठे थाना प्रभारी भूपदेवपुर, चौपाल में महिलाओं से सहज संवाद।
💥 थाना प्रभारी ने महिलाओं को बताए शराब के सामाजिक दुष्परिणाम।
💥महिला समूहों ने उठाया बीड़ा, गांव में न शराब बनाएंगे, न बिकने देंगे।
💥अवैध शराब की सूचना पुलिस को देने का लिया संकल्प।
💥एसएसपी की जमीनी पहल से ‘ऑपरेशन आघात’ को मिल रहा सामाजिक सहयोग।
तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। जिले में नशे के खिलाफ जारी जंग अब और तेज होने लगा है। यह लड़ाई केवल पुलिस की कार्रवाई तक सीमित न रखते हुए उसे जनभागीदारी का अभियान बनाने की दिशा में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह की रणनीति अब गांवों में असर दिखाने लगी है। “ऑपरेशन आघात” के तहत अवैध शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई के साथ एसएसपी श्री सिंह ने पुलिस अधिकारियों को ग्रामीणों, विशेषकर महिला समूहों को नशे के खिलाफ अभियान से जोड़ने पर जोर दिया है। इसी सोच को जमीन पर उतारते हुए थाना प्रभारी भूपदेवपुर निरीक्षक रोशन कुमार कौशिक ने स्वयं गांवों में पहुंचकर महिलाओं के बीच चौपाल लगाई और नशे के खिलाफ सामाजिक आंदोलन खड़ा करने की दिशा में पहल की।

इसी कड़ी में थाना प्रभारी निरीक्षक रोशन कुमार कौशिक ने ग्राम बिलासपुर में महिला समूहों के साथ बैठक की। ग्राम बिलासपुर में आयोजित चौपाल में थाना प्रभारी ने पुलिस अधिकारी की औपचारिक दूरी के बजाय महिलाओं के बीच जमीन पर बैठकर उनसे सीधे और सहज संवाद किया। उन्होंने महिलाओं से गांव की स्थिति, नशे से जुड़ी समस्याओं और अवैध शराब के संबंध में जानकारी ली तथा उन्हें समझाया कि नशे की समस्या केवल शराब पीने वाले व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर परिवार, बच्चों, महिलाओं और पूरे समाज पर पड़ता है।
थाना प्रभारी ने महिलाओं को बताया कि नशे के कारण परिवारों में विवाद और घरेलू हिंसा बढ़ती है, आर्थिक स्थिति कमजोर होती है तथा कई बार नशे की लत व्यक्ति को चोरी, मारपीट और अन्य गंभीर अपराधों की ओर धकेल देती है। नशे में वाहन चलाने से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। उन्होंने महिलाओं से कहा कि यदि गाँव को नशे से बचाना है तो महिलाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे परिवार और समाज की स्थिति को सबसे करीब से देखती हैं।
एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशों का हवाला देते हुए थाना प्रभारी ने महिलाओं को भरोसा दिलाया कि भूपदेवपुर पुलिस अवैध शराब के मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतेगी। अवैध शराब की बिक्री, निर्माण अथवा तस्करी की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना देने की अपील की गई। साथ ही महिला एवं बाल सुरक्षा को लेकर पुलिस की संवेदनशीलता बताते हुए “हेलो सिस्टर” हेल्पलाइन नंबर 94792-70533 की जानकारी भी दी गई। थाना प्रभारी ने ग्रामीणों को गाँव में आने वाले संदिग्ध अथवा बाहरी व्यक्तियों की गतिविधियों पर नजर रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना पुलिस को देने के लिए भी जागरूक किया।
थाना प्रभारी की बातचीत का असर बैठक में साफ दिखाई दिया। महिला समूह की सदस्यों ने एकजुट होकर गाँव में अवैध शराब के निर्माण और बिक्री को रोकने में पुलिस का सहयोग करने का संकल्प लिया। महिलाओं ने भरोसा दिलाया कि वे अपने गाँव को नशे से बचाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएंगी और अवैध शराब से जुड़ी किसी भी जानकारी को पुलिस तक पहुंचाएंगी।
दरअसल, एसएसपी शशि मोहन सिंह की इस पहल का उद्देश्य “ऑपरेशन आघात” को केवल रेड, गिरफ्तारी और जब्ती तक सीमित रखना नहीं, बल्कि समाज को साथ लेकर नशे के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा तंत्र तैयार करना है। इसी रणनीति के तहत थाना प्रभारी रोशन कुमार कौशिक स्वयं ग्रामीणों के बीच पहुंचकर पुलिस और जनता के बीच भरोसे की कड़ी मजबूत कर रहे हैं। एसएसपी की रणनीतिक सोच और थाना प्रभारी की जमीनी सक्रियता का यह तालमेल नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को सामाजिक आंदोलन में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
“नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस की लड़ाई नहीं है, यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है। अवैध शराब और मादक पदार्थों के कारोबार पर पुलिस सख्ती से कार्रवाई करती रहेगी, लेकिन स्थायी बदलाव के लिए हमें गाँव और परिवारों को भी इस अभियान से जोड़ना होगा। विशेषकर महिलाओं की जागरूकता और सहभागिता नशे के खिलाफ हमारी सबसे बड़ी ताकत है। रायगढ़ पुलिस कार्रवाई के साथ जागरूकता और जनभागीदारी को भी प्राथमिकता देते हुए नशामुक्त समाज की दिशा में लगातार काम करेगी।”- एसएसपी शशि मोहन सिंह, रायगढ़।
बहरहाल, एसएसपी रायगढ़ द्वारा नशे के खिलाफ उठाया गया यह कदम निश्चित ही प्रशंसा के योग्य है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस पहल से घूँघट और घर की दहलीज तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं भी जागरूक और निर्भीक होकर आगे आ रही हैं और पुलिस को सहयोग कर रही हैं। बेतहाशा बन रही कच्ची शराब और खपत में बात तह तक की करें तो 50 से 60 रूपये किलो में सूखे महुआ फूल की उपलब्धता आसानी से हो जाती है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि एक किलो महुआ से औसतन एक लीटर शराब बन जाती है और थोक में डेढ़ सौ तथा चिल्हर में तीन सौ रूपये तक बिक जाती है। यही वजह है कि नशे के सौदागर पकड़े जाने के बाद भी छूट कर आते ही फिर बनाना शुरू कर देते हैं।



