तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। भ्रष्टाचार, घोटाला, हेराफेरी, फर्जीवाड़ा, कालाबाजारी जैसे अपराधों के जमाने में भला गैस एजेंसियाँ कैसे अछूती रह सकती हैं? एलपीजी उपभोक्ताओं में जहाँ गैस की किल्लत और महँगाई की हायतौबा मची है वहीं, गैस एजेंसी संचालक नीति-नियमों को ताक पर रख मनमानी कर रहे हैं। बता दें कि रायगढ़ में जिंदल परिसर के गेट नंबर-2 के पास स्थित इण्डेन गैस एजेंसी में घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों के स्टॉक व वितरण में भारी गड़बड़ी का मामला प्रकाश में आया है।
मिली जानकारी के मुताबिक, एजेंसी के गोदाम में खाद्य विभाग की जाँच में 816 सिलेंडर स्टॉक से कम पाए गए हैं, जिनकी कीमत लगभग 10.72 लाख रुपये आंकी गई। जाँच में यह भी खुलासाहुआ है कि कई उपभोक्ताओं ने रिफिल बुकिंग करवाई, बिल भी जनरेट हुए, परन्तु उपभोक्ताओं को सिलेंडर डिलीवरी नहीं हुई। जबकि रिकॉर्ड में वितरण दर्ज है। 1,878 उपभोक्ता ऐसे मिले जो इंतजार करते रहे। नए कनेक्शन के मामलों में भी बिना सिलेंडर दिए ऑनलाइन डिलीवरी दर्ज कर दी गई। गोदाम में सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ी लापरवाही पायी गयी है।
विदित हो कि कोतरा रोड थाने में प्रदाय एवं वितरण विनियमन आदेश 2000 के उल्लंघन में एजेंसी प्रभारी टीकाराम पटेल, गोदाम प्रभारी भजराम धोबी, कंप्यूटर ऑपरेटर चेतन बरेठ और आशीष गेरा समेत 4 लोगों के विरुद्ध एफ.आई.आर. दर्ज की गई है।
बहरहाल, खाद्य विभाग की इस कार्रवाई से जहाँ काले कारोबारियों में हड़कंप का माहौल देखने को मिल रहा है वहीं, उपभोक्ताओं ने राहत की साँस ली है।



