💥हत्या के बाद ब्लेड से कलाई काटकर रची थी आत्महत्या की कहानी, पत्नी और दो अपचारी बालक गिरफ्तार।
तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। नशे के दलदल में कुछ लोग इस कदर डूब चुके हैं कि अपने पुरखों की खून-पसीने से कमाई संपत्ति की जरा भी परवाह नहीं है। संपत्ति के बदले मुआवजे के रूप मिले रकम से अन्यत्र जमीन-जायदाद खरीदने के बजाय शराबखोरी में लूटा रहे हैं। ऐसे में न चाहते हुए भी घर की महिलाएं चंडी का रूप धारण करने को मजबूर हो जाती हैं। ऐसी ही एक घटना में पूंजीपथरा पुलिस ने ग्राम तराईमाल के धनवारपारा स्थित किराए के मकान में मिले 50 वर्षीय गनपती लाल भगत के शव के मामले में महज दो दिनों के भीतर सनसनीखेज अंधे कत्ल का खुलासा कर दिया। प्रारंभिक तौर पर संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत प्रतीत होने वाले इस मामले में पुलिस ने गहन विवेचना, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पूछताछ के आधार पर हत्या की साजिश का पर्दाफाश करते हुए मृतक की पत्नी तथा दो विधि से संघर्षरत अपचारी बालकों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा है। मामला मृतक के शराबखोरी और जमीन मुआवजा में मिले रकम को लगातार शराब में खर्च करने को लेकर सामने आया है।
जानकारी अनुसार दिनांक 25 जुलाई 2026 को मृतक के दामाद सोनसाय उरांव (27 साल) ने थाना पूंजीपथरा में सूचना दी कि उसके ससुर गनपती लाल भगत (50 साल) का शव किराए के कमरे में तख्त पर पड़ा है। शव के गले में साड़ी जैसा कपड़ा बंधा था तथा बाएं हाथ की कलाई पर कटने के निशान थे। सूचना पर पुलिस ने मर्ग कायम कर पंचनामा कार्रवाई की तथा पोस्टमार्टम कराया। घटनास्थल और परिस्थितियों को देखते हुए मामला संदिग्ध प्रतीत हुआ, जिस पर पुलिस ने हत्या की आशंका के आधार पर गहन जांच शुरू की। मृतक के शर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी हत्या की पुष्टि हुई।
जांच के दौरान पुलिस को मृतक के परिवार पर संदेह हुआ। मृतक की पत्नी गंगाबाई भगत से सघन पूछताछ की गई, जिसमें उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसने बताया कि करीब एक साल पहले पैतृक जमीन गारे पेलमा माइंस में अधिग्रहण होने पर बंटवारे में 25-30 लाख रूपये इसके पति को मिला था जिसे धीरे-धीरे-धीरे कर शराब में उड़ा रहा था, मांगने पर विवाद करता था। 23 जुलाई 2026 की सुबह गनपती लाल भगत शराब के नशे में घर पहुँचा और पत्नी तथा बच्चों के साथ मारपीट करने लगा। वर्षों से घरेलू हिंसा, प्रताड़ना और गारे-पेलमा कंपनी में मुआवजा रकम को लगातार निकाल कर उठा रहा था जिससे परेशान होकर गुस्से में गंगाबाई तथा दो अन्य आरोपित ने मिलकर साड़ी और गमछे से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद पुलिस को गुमराह करने और घटना को आत्महत्या दर्शाने के उद्देश्य से ब्लेड से मृतक की बाईं कलाई की नस काटी गई तथा उस पर कपड़ा ढंक दिया गया।
पूछताछ में मिले तथ्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपिया गंगाबाई भगत (45 वर्ष) एवं दो विधि से संघर्षरत अपचारी बालकों के विरुद्ध धारा 103(1), 238 एवं 3(5) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अपराध दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।
एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन में एडिशनल एसपी अनिल सोनी तथा डीएसपी सुशांतो बनर्जी के मार्गदर्शन में इस अंधे कत्ल के सफल खुलासे में थाना प्रभारी पूंजीपथरा निरीक्षक रामकिंकर यादव, उप निरीक्षक दिलीप कुमार बेहरा एवं थाना पूंजीपथरा की पुलिस टीम की सूझबूझ, वैज्ञानिक विवेचना और सतत पूछताछ की भूमिका सराहनीय रही। वहीं, एएसआई उमाशंकर विश्वाल, प्रधान आरक्षक विनीत तिर्की, आरक्षक विनोद शर्मा, नरेन्द्र पैंकरा, विक्रम कुजूर, सुरेन्द्र यादव, चन्द्रशेखर चन्द्राकर, महिला आरक्षक संगीता भगत और सुमन राठिया ने भी अहम भूमिका निभायी।
"हर संदिग्ध मृत्यु की रायगढ़ पुलिस वैज्ञानिक और तथ्यपरक तरीके से जांच करती है। अपराधी कानून से बच नहीं सकता। इस मामले में पुलिस टीम ने सूक्ष्म विवेचना, साक्ष्यों के विश्लेषण और प्रभावी पूछताछ से हत्या के पीछे की साजिश का पर्दाफाश किया।"- एसएसपी शशि मोहन सिंह, रायगढ़।



