तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। धरमजयगढ़ वन मंडल में इन दिनों हाथियों का उत्पात लगातार बढ़ रहा है। आये दिन कहीं न कहीं हाथी-मानव द्वन्द की खबरें निरंतर सामने आ रही हैं। ऐसी ही एक चिन्ताजनक खबर धरमजयगढ़ वन मंडल के तालगांव, अलोला, लिप्ती, पखनाकोट, प्रेमनगर, क्रोंधा, खम्हार सहित कई हाथी प्रभावित गांवों से आ रही है, जहाँ हाथियों ने तांडव मचा रखा है। ग्रामीणों में जहाँ दहशत माहौल है वहीं, लोग डरे-सहमे जीवन-यापन करने को मजबूर हैं।
आपको बता दें कि, इन दिनों कटहल पकने लगे हैं और इसकी तेज महक से हाथी आकर्षित होकर गाँवों की तरफ रुख कर रहे हैं। पके कटहल खाने के साथ ही साथ गाँव में लगे फसलों को भी नुकसान पहुँचा रहे हैं। यही नहीं, मकानों को भी तोड़ रहे हैं। हाथी प्रभावित गांवों में ग्रामीण सतर्क रहकर हर रात रतजगा कर रहे हैं।
वन विभाग की मानें तो धरमजयगढ़ वन मंडल के विभिन्न क्षेत्रों में 100 से अधिक हाथी विचरण कर रहे हैं। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि ग्रामीण कितने विषम परिस्थितियों में जीवन जीने को विवश हैं। हालाँकि, हाथी-मानव द्वन्द को रोकने के लिए वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी हर संभव लगातार प्रयास कर रहे हैं।

बहरहाल, वन विभाग द्वारा प्रभावित गांवों में लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। वहीं, ग्रामीणों को समझाइश दी जा रही है कि हाथियों के नजदीक न जाएं, उन्हें किसी भी तरह से उकसाने का प्रयास न करें और कटहल जैसे फलों को खुले में न छोड़कर जमीन में दफना दें या पानी में बहा दें, ताकि उनकी गंध हाथियों को गांव की ओर आकर्षित न कर सके। डीएफओ ने बताया कि विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है और मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रामीणों से अपील करते हुए उन्होंने कहा है कि, हाथियों की सूचना तत्काल वन विभाग को दें और विभाग के निर्देशों का पालन करें।


