शर्मनाक हरकत; जूते को भीगने से बचाने के फेर में नप गये पटवारी साहब

💥65 साल के बुजुर्ग की पीठ पर सवार होकर किया नाला पार।
💥जंगली जानवरों द्वारा फसलों और घर को हुए नुकसान का जायजा लेने  गया था गांव।
💥कलेक्टर ने किया तत्काल सस्पेंड।

तहतक न्यूज/एम.पी.। नौकरशाह छोटे हों या बड़े, किताबों में आम जनता के सेवक कहलाते हैं, लेकिन वास्तविकता इससे कोसों दूर है। भ्रष्टाचार और घोटाले के इस जमाने में अंतिम स्तर के शासकीय कर्मचारियों की तो बात ही निराली है। मैदानी स्तर पर आम जनता से रूबरू होने वाले ये शासकीय कर्मचारी ही होते हैं जिनके आगे जनता खासकर गरीब ग्रामीण जनता एक पाँव पर खड़े होकर पलकों पर बिठाने को तत्पर रहते हैं। यहाँ तक कि कार्य करने के एवज में सेवा-सत्कार रूपी धनराशि (रिश्वत) भी भेंट करते हैं। इसके बावजूद भी इनके उटपटांग फरमाइशें भी पूरी करनी पड़ती हैं। हद तो तब हो जाती है जब ये अपने से उम्र में काफी बड़े बुजुर्गों के सम्मान तक का ख्याल नहीं रखते। जी हाँ, ऐसी ही एक शर्मनाक घटना मध्य प्रदेश के सीधी जिले की है, जहाँ अपने जूते गीले होने से बचाने के लिए एक पटवारी 65 साल के बुजुर्ग की पीठ पर सवार होकर नाला पार करता नजर आया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। आरोपी पटवारी का नाम नीलेश नामदेव है, जो सीधी जिले की माटा ग्राम पंचायत में पदस्थ था। पटवारी नीलेश नामदेव जंगली जानवरों द्वारा फसलों और घर को हुए नुकसान का जायजा लेने गांव गया था। रास्ते में एक पानी से भरा नाला पड़ा। अपने जूते और पैर भीगने से बचाने के लिए उसने गांव के ही 65 वर्षीय बुजुर्ग ललवा केवट से उसे पीठ पर बैठाकर नाला पार कराने को कहा। पटवारी ने कथित तौर पर यह भी कहा कि अगर उसे पार नहीं ले जाया गया, तो वह सर्वे नहीं करेगा। जैसे ही इस घटना का करीब 45 सेकंड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीधी के कलेक्टर विकास मिश्रा ने पटवारी नीलेश नामदेव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही मामले की जांच के आदेश भी दिए गए हैं।

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