परिजनों की अनदेखी ने छीन ली महिला और उसकी मासूम बेटी की जिंदगी

तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। "स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है" यह कहावत जितनी पुरानी है, उतनी ही प्रासंगिक भी है। अक्सर लोग शारीरिक चोट या बीमारी पर तो तुरंत ध्यान देते हैं, लेकिन मन के घावों को नजरअंदाज कर देते हैं। मानसिक असंतुलन वह अवस्था है जब कोई व्यक्ति अपनी भावनाओं, विचारों और दैनिक गतिविधियों में सामंजस्य नहीं बिठा पाता है। मानसिक असंतुलन का सबसे दुखद पहलू इससे जुड़ा सामाजिक कलंक है। आज भी समाज में मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति को 'पागल' या 'कमजोर' मान लिया जाता है और उसके हाल पर छोड़ दिया जाता है। ऐसे ही एक मामले में मानसिक रूप से अस्वस्थ एक जवान महिला और उसकी दुधमुंही बच्ची को परिजनों ने उसके हाल पर छोड़ दिया था। नतीजा, किसी ने मारपीट कर दोनों को मौत के घाट उतार दिया।
         बता दें कि, थाना लैलूंगा क्षेत्र के ग्राम छापरपानी में गांव के बाहर एक सुने बोर घर में आश्रय ले रही महिला एवं उसकी 10 माह की मासूम बच्ची की लाश मिली है।
          मृतका बरत कुमारी (35 साल) का विवाह लगभग चार-पांच वर्ष पूर्व हुआ था। पति की मृत्यु के बाद उसकी मानसिक स्थिति सामान्य नहीं रहती थी, जिसके कारण वह अपने मायके में रह रही थी। वह अक्सर गांव में घूमती रहती थी और ग्राम के प्रहलाद बेहरा के खेत स्थित बोर मकान में रहने लगी थी।
        16 जुलाई की सुबह गांव के ननकूराम ने परिजनों को बताया कि बरत कुमारी के साथ किसी अज्ञात व्यक्ति ने मारपीट की है तथा उसके सिर और चेहरे से खून निकल रहा है। सूचना मिलने पर परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुँचे, जहाँ बरत कुमारी गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिली। उसके सिर एवं चेहरे पर किसी भारी वस्तु से हमला किया गया था। वहीं उसके पास सो रही उसकी 10 माह की पुत्री परी भी गंभीर रूप से घायल मिली, जिसकी मौके पर ही मृत्यु हो चुकी थी।
          मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह स्वयं थाना लैलूंगा पहुँचे तथा संदेहियों से पूछताछ कर एसडीओपी धरमजयगढ़ सिद्दांत तिवारी एवं विवेचना टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। पुलिस द्वारा संदेहियों से लगातार पूछताछ की जा रही है तथा वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले के शीघ्र खुलासे के लिए सभी पहलुओं पर गहन जाँच जारी है।
       दिल को दहला देने वाली इस दुःखद घटना में बात तहतक की करें तो मानसिक असंतुलन कोई अभिशाप या कमजोरी नहीं है, बल्कि एक चिकित्सीय स्थिति है जिसका इलाज संभव है। एक स्वस्थ समाज का निर्माण तभी हो सकता है जब हम शारीरिक स्वास्थ्य की तरह ही मानसिक स्वास्थ्य को भी समान महत्व देंगे। हमें अपनी सोच को बदलना होगा ताकि मानसिक तनाव से जूझ रहा कोई भी व्यक्ति खुलकर मदद मांग सके और सम्मानजनक जीवन जी सके। अक्सर देखा गया है कि गरीबी और अशिक्षा की वजह से मानसिक रूप से बीमार लोगों को उसके हाल पर छोड़ दिया जाता है, जिससे वे भिखारियों की तरह इधर-उधर भटकते हुए असुरक्षित जीवन जीने को मजबूर हो जाते हैं। मृतका बरत कुमारी के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ जिसके कारण यह घटना हुई। यदि, ससुराल या मायके वाले उसका समुचित इलाज करवाते और अपने घर पर रखे होते तो आज दोनों माँ बेटी जिंदा रहतीं।
         फिलहाल, घटनास्थल का एफएसएल एवं डॉग स्क्वॉड की टीम के साथ पुलिस ने सूक्ष्म निरीक्षण कर महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्य एकत्रित किए हैं। मामले में थाना लैलूंगा में अज्ञात आरोपी के विरुद्ध सुसंगत धाराओं के तहत हत्या का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई है। इस सम्बन्ध में एसएसपी शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट किया है कि "पुलिस टीम हर पहलू पर गंभीरता से जाँच कर रही है। उपलब्ध सभी वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की शीघ्र पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।"

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