अपराध कितना भी सुनियोजित क्यों न हो, वैज्ञानिक विवेचना और सशक्त पुलिसिंग के सामने बच नहीं सकते अपराधी। - शशि मोहन सिंह

💥भूमि विवाद को लेकर दो भाईयों ने रची थी हत्या की साजिश, साक्ष्य मिटाने के लिए घर में लगाई आग।
💥धरमजयगढ़ पुलिस ने 72 घंटे में सुलझाया ब्लाइंड डबल मर्डर, भूमि विवाद में दंपति की टांगी से हत्या कर शवों को जलाया।

तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। "जर, जोरू और जमीन" भारतीय समाज में एक बेहद लोकप्रिय और प्राचीन कहावत है, जिसका सीधा अर्थ है कि दुनिया में होने वाले अधिकांश झगड़ों, विवादों और युद्धों की जड़ में यही तीन चीजें होती हैं। इतिहास से लेकर आज के दौर तक, समाज में होने वाले ज्यादातर बड़े संघर्षों के पीछे मुख्य रूप से धन (जर), स्त्री (जोरू), संपत्ति (जमीन) का ही विवाद शामिल रहा है। जर यानि धन और जोरू यानि पत्नी (स्त्री) के बारे में यह कहावत सत्य हो या न हो, लेकिन जमीन के मामले में तो यह बहुत हद तक सटीक बैठती है, खासकर धरमजयगढ़ ब्लाइंड मर्डर केस इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।
        बता दें कि, धरमजयगढ़ पुलिस ने ग्राम क्रोंधा देवमारीडांड में दंपति की निर्मम हत्या एवं शव जलाकर साक्ष्य मिटाने के सनसनीखेज ब्लाइंड मर्डर केस का महज तीन दिन के भीतर खुलासा करते हुए दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने वर्षों पुराने भूमि विवाद की रंजिश में दंपति की टांगी से हत्या कर उनके शवों एवं घर में आग लगा दी थी, ताकि हत्या को दुर्घटना का रूप दिया जा सके।
           दिनांक 15 जुलाई 2026 को थाना धरमजयगढ़ क्षेत्र अंतर्गत ग्राम क्रोंधा निवासी मंगल राठिया (65 वर्ष) एवं उनकी पत्नी पुनाई बाई राठिया (55 वर्ष) के घर के भीतर दोनों के जले हुए शव मिलने की सूचना पुलिस को प्राप्त हुई थी। सूचना मिलते ही एसडीओपी धरमजयगढ़  सिद्धांत तिवारी, थाना प्रभारी धरमजयगढ़ निरीक्षक राजेश जांगड़े, थाना प्रभारी घरघोड़ा निरीक्षक कुमार गौरव, एफएसएल टीम, डॉग स्क्वॉड तथा थाना धरमजयगढ़, कापू एवं रैरूमाखुर्द का पुलिस बल तत्काल घटनास्थल पहुंचा। घटनास्थल का वैज्ञानिक तरीके से निरीक्षण कर साक्ष्य एकत्र किए गए तथा दोनों शवों का पंचनामा एवं पोस्टमार्टम कराया गया।
       मृतक के यहां कार्य करने वाले रामलाल चौहान (35 वर्ष) निवासी क्रोंधा बौधपारा ने बताया कि वह पिछले लगभग तीन वर्षों से मृतक मंगल राठिया के घर में कार्य कर रहा है। 14 जुलाई 2026 को वह प्रतिदिन की तरह काम कर शाम को अपने घर चला गया था। उस समय घर में केवल मंगल राठिया और उनकी पत्नी पुनाई बाई राठिया मौजूद थे। आज सुबह लगभग 6 बजे जब वह काम पर पहुंचा तो घर का मुख्य दरवाजा खुला मिला। अंदर जाने पर घर के सभी दरवाजे खुले थे तथा एक कमरे से धुआं निकल रहा था। कमरे के बाहर से देखने पर उसने मंगल राठिया का शव जली हुई अवस्था में जमीन पर पड़ा देखा तथा उसके पास ही उनकी पत्नी पुनाई बाई राठिया का भी जला हुआ शव पड़ा था। इसके बाद उसने मृतक के परिजनों को घटना की सूचना दी। थाना धरमजयगढ़ में अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध अपराध क्रमांक 189/2026, धारा 103(1), 238(बी), 326(जी) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई।
               घटनास्थल पर मिले हत्या में प्रयुक्त टांगी की गंध लेकर पुलिस डॉग रूबी ने श्याम लाल राठिया तक पहुंचने का संकेत दिया। वहीं गवाहों से पूछताछ में मृतक एवं श्याम लाल राठिया के परिवार के बीच पूर्व से भूमि विवाद होने की जानकारी मिली। पुलिस डॉग के संकेत, एफएसएल साक्ष्यों, ह्यूमन इंटेलिजेंस तथा वैज्ञानिक पूछताछ के आधार पर संदेही श्याम लाल राठिया एवं उसके भाई जीवन लाल राठिया से अलग-अलग पूछताछ की गई, जिसमें दोनों ने हत्या का अपराध स्वीकार कर लिया।
               पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वर्ष 2013 में उन्होंने एक भूमि खरीदी थी, जिसे बाद में अधिक कीमत मिलने पर मूल विक्रेता ने मृतक मंगल राठिया को बेच दिया था। समझौते के तहत आरोपियों को उनकी राशि वापस मिल गई थी, लेकिन मृतक द्वारा उसी भूमि पर मकान बनाकर खेती करने से दोनों भाइयों के मन में लगातार रंजिश बनी रही। इसी रंजिश के चलते दोनों ने 14 जुलाई 2026 की रात टांगी लेकर मृतक के घर में प्रवेश किया। दरवाजा खुलते ही मंगल राठिया पर टांगी से ताबड़तोड़ वार कर उसकी हत्या कर दी। शोर सुनकर बाहर आई उनकी पत्नी पुनाई बाई की भी टांगी से हत्या कर दी। इसके बाद दोनों आरोपियों ने शवों पर घर में रखे कपड़े, सोफा कवर एवं अन्य सामान डालकर आग लगा दी तथा दो कमरों में भी आग लगाकर हत्या के साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। घटना में प्रयुक्त टांगी वहीं छोड़कर दोनों मौके से फरार हो गए।
         पुलिस ने आरोपियों के मेमोरेंडम के आधार पर हत्या में प्रयुक्त टांगी एवं घटना के समय पहने गए कपड़े बरामद कर जब्त कर लिए हैं।
          इस अंधे हत्या प्रकरण के सफल खुलासे में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी एवं एसडीओपी धरमजयगढ़ सिद्धांत तिवारी के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी धरमजयगढ़ निरीक्षक राजेश जांगड़े, थाना प्रभारी घरघोड़ा निरीक्षक कुमार गौरव साहू, प्रशिक्षु उप निरीक्षक शिवम कोंगरे, एएसआई मंजु मिश्रा, एएसआई गंगाराम भगत, एएसआई राम संजीवनी वर्मा, प्रधान आरक्षक प्रकाश गिरी, आरक्षक मनोज कुमार, विजयानंद राठिया, ललित राठिया, इलियास केरकेट्टा, अलेक्स, महिला आरक्षक ज्योति यादव, एफएसएल टीम तथा पुलिस डॉग रूबी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
    "आपसी रंजिश या भूमि विवाद का समाधान कानून के दायरे में ही होना चाहिए। क्षणिक आवेश में लिया गया हिंसक निर्णय न केवल निर्दोषों की जान लेता है, बल्कि आरोपी और उसके पूरे परिवार का भविष्य भी बर्बाद कर देता है। धरमजयगढ़ पुलिस, एफएसएल टीम और पुलिस डॉग रूबी के समन्वित प्रयासों ने एक बार फिर अंधे हत्या प्रकरण का सफल खुलासा किया है।" -एसएसपी शशि मोहन सिंह, रायगढ़।

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