तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। लैलूंगा विधानसभा क्षेत्र के दो दशक से जर्जर कुंजारा-केशला-तोलगे सड़क मार्ग के निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी, लैलूंगा को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें 31 जुलाई 2026 तक सड़क निर्माण अथवा मरम्मत कार्य शुरू कराने की मांग की है। साथ ही निर्धारित समय तक काम शुरू नहीं करवाने पर अनिश्चितकालीन चक्काजाम करने की स्पष्ट चेतावनी भी दी है।
ग्रामीणों की मानें तो पिछले 20 सालों से यह सड़क खराब पड़ी है। इस सड़क मार्ग से 15 ग्राम पंचायत जुड़े हैं और इसी सड़क से हजारों ग्रामीण प्रतिदिन आना-जाना करते हैं। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे, उखड़े हुए डामर और कीचड़ के कारण सफर करने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बारिश के दिनों में तो स्थिति और भी बदतर हो जाती है।
आरोप यह भी है कि हर बार शासन और प्रशासन लोगों को केवल आश्वासन देता आ रहा है, लेकिन सड़क निर्माण आज तक शुरू नहीं करा सके। खराब सड़क के कारण अनेकों दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं। आम ग्रामीणों के अलावा स्कूली छात्र-छात्राओं, व्यापारियों, किसानों और मरीजों को कई दिक्कतों का सामना कर पड़ रहा है। जर्जर सड़क और परेशानियों को लेकर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के समक्ष भी कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
बात करें तहतक की तो आदिवासी बाहुल्य लैलूंगा विधानसभा क्षेत्र में देश के बड़े-बड़े धनकुबेरों का आधिपत्य है, परन्तु यह हमेशा से उपेक्षित रहा है और आज भी यहाँ का जन-जीवन विकास का बाट जोह रहा है। मूलभूत सुविधाओं जैसे बिजली, पानी, स्वास्थ्य और सड़क की बात करें तो क्षेत्र के कई गाँव ऐसे हैं जो उक्त सुविधाओं से कोसों दूर हैं। विडंबना यह है कि आदिवासी विधायक होने के बावजूद यहाँ की आम आदिवासी जनता त्राहिमाम् करने को मजबूर है।
बहरहाल, जर्जर सड़क के निर्माण को लेकर अब जनआक्रोश खुलकर सामने आ गया है। ग्रामीणों ने एसडीएम लैलूंगा को ज्ञापन सौंपते हुए 31 जुलाई 2026 तक बहुप्रतीक्षित कुंजारा-केशला-तोलगे सड़क के निर्माण अथवा मरम्मत कार्य शुरू कराने की मांग की है। साथ ही स्पष्ट चेतावनी भी दी है कि यदि तय समय तक काम शुरू नहीं हुआ तो लैलूंगा-घरघोड़ा मुख्य मार्ग स्थित कुंजारा के पास केशला मोड़ पर अनिश्चितकालीन चक्काजाम किया जाएगा। फिलहाल, ज्ञापन सौंपे जाने के दौरान आदिवासी नेता रवि भगत की दमदार उपस्थिति ने जहाँ प्रशासनिक और राजनैतिक हलके में हलचल मचा दी है वहीं, लोगों में उनकी माँग पूरी होने की उम्मीद बढ़ गयी है। अन्यथा की स्थिति में किसी बड़े जन आंदोलन से इंकार नहीं किया जा सकता।



