यात्री बसों में परमिट की शर्तों का खुला उल्लंघन, दर्जनों बसों पर चला आरटीओ का चाबुक


तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। जिले में यात्री बस संचालकों, परिचालकों की मनमानी चरम पर है। यात्रियों से निर्धारित दर से अधिक किराया वसूलना, किराया सूची नहीं रखना, अग्निशमन यंत्र उपलब्ध नहीं होना, क्षमता से अधिक सवारी बैठाना, परमिट की शर्तों का उल्लंघन करना, लोकल सवारियों से दुर्व्यवहार करना जैसे अनेक शिकायतें हैं। इन्हीं सब बातों को लेकर  परिवहन आयुक्त के निर्देशानुसार और कलेक्टर के मार्गदर्शन में परिवहन विभाग यात्री बसों की जाँच कर रहा है। जाँच के दौरान नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित बस संचालकों के खिलाफ चालानी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में 45 बसों से कुल 1 लाख 14 हजार 100 रुपये जुर्माना वसूला गया है। वहीं, बिना फिटनेस और टैक्स के संचालित एक बस को जब्त भी किया गया है।
       जिला परिवहन अधिकारी ने बताया कि जाँच के दौरान बसों में कई तरह की अनियमितताएं सामने आईं। इनमें यात्रियों से निर्धारित दर से अधिक किराया वसूलना, किराया सूची नहीं रखना, अग्निशमन यंत्र उपलब्ध नहीं होना, क्षमता से अधिक सवारी बैठाना और परमिट की शर्तों का उल्लंघन करना शामिल है। इसके अलावा कंडक्टर लाइसेंस, ड्राइविंग लाइसेंस तथा बसों के ऊपर सामान ले जाने से संबंधित मामलों में भी नियमानुसार कार्रवाई की गई है।
बसों की छत पर सामान ले जाने पर भी जुर्माना
       बसों के ऊपरी हिस्से में सामान ले जाने और लापरवाही से वाहन चलाने के मामलों में परिवहन विभाग ने अलग-अलग धाराओं के तहत 22 हजार रुपये का चालान किया है। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसे मामलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि बसों का संचालन सुरक्षित तरीके से हो और किसी भी तरह की लापरवाही से दुर्घटना की आशंका न बढ़े। जिला प्रशासन का उद्देश्य जिले में यात्री बसों का संचालन निर्धारित मानकों के अनुसार कराना और यात्रियों को सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके लिए बसों के आवश्यक दस्तावेजों, फिटनेस, परमिट, निर्धारित यात्री क्षमता और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की जाँच की जा रही है। जिला परिवहन अधिकारी ने बस संचालकों से नियमों का पालन करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने कहा है कि जाँच के दौरान अनियमितताएं मिलने पर नियमानुसार चालानी कार्रवाई की जाएगी।
        बात करें तहतक की तो बसों के आवश्यक दस्तावेजों, फिटनेस, परमिट, निर्धारित यात्री क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही तो है ही, यात्रियों से दुर्व्यवहार भी किया जाता है। आसपास 10 से 15 कि.मी.के स्थानीय सवारी ज्यादा परेशान होते हैं। नजदीक के सवारियों को उतारकर पहले दूर के यात्रियों को बैठाया जाता है और सीट फुल होने के बाद लोकल यात्रियों को चढ़ाते हैं। यही नहीं, इनको टिकट भी नहीं दिया जाता। सीधे-सादे ग्रामीण बस में खड़े-खड़े ही सफर कर लेते हैं। वे अपने परेशानियों को लेकर इनसे उलझना भी नहीं चाहते। हाँ, जब अति होता है तो गाँव से गुजरने के दौरान कभी-कभार इनकी जमकर ठुकाई भी जाती है।


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