तहतक न्यूज/रायपुर,छत्तीसगढ़। राजधानी रायपुर में भारतीय किसान संघ के बैनर तले प्रदेशभर के हजारों किसानों ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर 'अन्नदाता गर्जना रैली' के जरिए एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया है। 27 अक्टूबर 2026 को नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर भारी संख्या में महिला और पुरुष किसान जुटे, जिसके बाद उन्होंने नया रायपुर स्थित महानदी भवन का घेराव करने का ऐलान कर दिया।


इस आंदोलन में किसान संगठनों ने सरकार के सामने 10 सूत्रीय मांगें रखी हैं, जिनमें मुख्य रूप से आर्थिक और व्यवस्था से जुड़े मुद्दे शामिल है।
किसानों की सबसे बड़ी मांग यह है कि पिछले तीन वर्षों में बढ़ाए गए ₹258 प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य वृद्धि का लाभ जोड़ते हुए इस बार ₹3,358 की दर से धान खरीदी की जाए
वर्ष 2022-23 की धान खरीदी की करीब ₹1,700 करोड़ की बकाया राशि तत्काल जारी करने की मांग की गई है।
धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर से शुरू कर 15 फरवरी तक की जाए।
प्रति तौल अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम धान ही स्वीकार करने का स्पष्ट शासकीय आदेश जारी किया जाए।
अन्य मुद्दे जैसे सिंचाई परियोजनाओं को गति देना, धान बोनस का समय पर भुगतान, और रबी सीजन की फसलों से जुड़ी पाबंदियों को हटाना।
उल्लेखनीय है कि, इस रैली का मुख्य नारा 'रायपुर चलो, कृषिमित् कृषस्व' (खेती ही करो) रखा गया है।
इस आंदोलन का केवल रायपुर ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी असर देखा जा रहा है। कवर्धा में किसानों ने एक विशाल ट्रैक्टर रैली निकाली और कई जगहों पर बैरिकेडिंग लगाकर रास्ता ब्लॉक कर दिया गया। आगे की रणनीति तय करते हुए किसान संघ ने ऐलान किया है कि 28 अक्टूबर को धमतरी में भी बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा, जिसके बाद अन्य जिलों में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन चलाया जाएगा।
बात तहतक की करें तो "किसान" समाज का एक ऐसा महत्वपूर्ण अंग जो सबका पेट भरता है। चिलचिलाती धूप हो, भारी बारिश हो या हाड़ कंपा देने वाली सर्दी हो, कड़ी मेहनत कर अन्न उगाता है और सबकी पेट भरता है। कम हो या ज्यादा प्रकृति ने जितना दिया उतने में ही संतुष्ट रहने वाला सीधा व सरल किसान की आत्मा जब सिसकती है तो देश व समाज के लिए यह किसी भूचाल से कम नहीं है। कागजी नोट और हीरे-जवाहरात से उदर की ज्वाला शांत नहीं होती और न ही भूख मिटती है। बिना खाद्यान्न के भला कोई जीवित रह सकता है? अब सवाल उठता है कि यदि सभी किसान खेती करना छोड़ दें और खदानों, कंपनियों में रोजी-मजूरी या अन्य व्यवसाय में लग जाएं तो भविष्य क्या होगा? क्या कोई इसका अनुमान लगा सकता है? किसानों की समस्या महज रैली नहीं अपितु पूरे मानव समाज के लिए गहन चिंतन का विषय है।


