परिवार कर चुका था उसका अंतिमसंस्कार..! बीमा की भी मिल गयी थी राशि, मगर वह लौट आया जिंदा..!


तहतक न्यूज। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक परिवार ने जिस बेटे को मृत समझकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था, वह करीब 15 से 17 दिन बाद जिंदा घर लौट आया है। यह पूरी घटना जिले के कसडोल विकासखंड के सुकली बरेली गांव की है। जिंदा लौटे युवक का नाम मोतीलाल विश्वकर्मा (उम्र 28 वर्ष) है, जो काफी समय से लापता था।
विदित हो कि, 28 जुलाई 2026 को पुलिस को सेमरा नाले के पास एक अज्ञात व्यक्ति का सड़ा-गला शव मिला था। हुलिए और परिस्थितियों के आधार पर परिजनों ने उसे मोतीलाल समझ लिया और पुलिस कार्रवाई के बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया। अंतिम संस्कार के बाद जब परिवार में दशगात्र आदि हो चुके थे, तभी 14 अगस्त 2026 को मोतीलाल अचानक जिंदा लौट आया।
        जानकारी के अनुसार, मोतीलाल मानसिक रूप से थोड़ा विक्षिप्त स्थिति में धमतरी इलाके में घूम रहा था। वहाँ एक सामाजिक कार्यकर्ता की नज़र उस पर पड़ी। उन्होंने युवक की फोटो और वीडियो सोशल मीडिया व पुलिस के जरिए शेयर की, जिससे बलौदाबाजार में उसके परिवार ने उसे पहचान लिया और एम्बुलेंस से वापस घर लाया गया।
पुलिस के सामने बड़ी चुनौती
        मोतीलाल के जिंदा लौटने से जहाँ एक तरफ उसका परिवार बेहद खुश है, वहीं अब स्थानीय पुलिस और प्रशासन के सामने सबसे बड़ा रहस्य यह खड़ा हो गया है कि सेमरा नाले में मिला वह अज्ञात शव आखिर किसका था जिसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। पुलिस इस गुत्थी को सुलझाने के लिए मामले की दोबारा जाँच कर रही है।
       बलौदाबाजार के इस बेहद अनोखे मामले में परिजनों से पहचान में भारी चूक होने के पीछे मुख्य कारण शव की अत्यंत खराब स्थिति थी, जिसके चलते पुलिस और कानून के सामने अब कई नई चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं।
28 जुलाई 2026 को गिरौदपुरी चौकी क्षेत्र के सेमरा नाले के पास जो शव मिला था, वह कई दिनों पुराना होने के कारण पूरी तरह सड़-गल चुका था। इस वजह से चेहरे और शरीर की सामान्य बनावट से पहचान करना लगभग नामुमकिन था। मोतीलाल काफी समय से लापता था और उसकी मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। जब नाले में हमउम्र अज्ञात युवक का शव मिला, तो लंबे समय से परेशान परिजनों ने गहरे मानसिक तनाव और जल्दबाजी में हुलिए व कपड़ों के अनुमान पर उसे मोतीलाल मान लिया। गुमशुदा बेटे को खोजने की हताशा और दुख के बीच परिजनों को लगा कि उनकी तलाश अब खत्म हो गई है और उन्होंने पुलिस कार्रवाई के बाद शव को अपना समझकर पारंपरिक रीति-रिवाजों से अंतिम संस्कार कर दिया।
मामले में आया नया कानूनी मोड़
        मोतीलाल के जिंदा लौटने के बाद अब इस मामले ने एक नया कानूनी मोड़ ले लिया है, जिसमें पुलिस कई बिंदुओं पर केंद्रित होकर जाँच आगे बढ़ा रही है।
अज्ञात शव की नए सिरे से शिनाख्त
        पुलिस के लिए अब सबसे बड़ी पहेली यह है कि वह शव आखिर किसका था? इसके लिए पुलिस आसपास के जिलों और थानों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्ट्स को खंगाल रही है, ताकि उस अज्ञात व्यक्ति के असली परिवार का पता लगाया जा सके।
मृत्यु के कारणों की जाँच
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि नाले में मिले उस व्यक्ति की मौत सामान्य (डूबने या बीमारी) थी, या फिर यह हत्या का मामला है।
डीएनए और फोरेंसिक रिकॉर्ड का मिलान
        शव सौंपने और अंतिम संस्कार से पहले पुलिस ने जो भी फोरेंसिक सैंपल (जैसे डीएनए या विसरा) सुरक्षित रखे होंगे, उन्हें अब भविष्य में मिलने वाले संभावित परिजनों के सैंपल से मैच किया जाएगा।
सरकारी व वित्तीय रिकॉर्ड का सुधार
         कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोतीलाल को मृत मानकर परिवार को बीमा या सरकारी सहायता राशि भी मिल चुकी थी। अब जब वह जीवित लौट आया है, तो पुलिस प्रशासन और संबंधित विभागों को कानूनी रूप से सूचित कर इन सरकारी और वित्तीय दस्तावेजों में सुधार कराया जाएगा ताकि कागजों पर मोतीलाल को दोबारा जीवित घोषित किया जा सके।

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