बैतूल की बेटी ने सिविल जज का पद त्याग आध्यात्मिक मार्ग चुनने का लिया फैसला


तहतक न्यूज। मध्य प्रदेश के बैतूल की रहने वाली प्रखरश्री जैन (26 वर्ष) ने सिविल जज परीक्षा पास करने के बावजूद पद ग्रहण करने से इनकार कर दिया और आध्यात्मिक मार्ग चुनने का फैसला किया है। प्रखरश्री जैन वकालत की पढ़ाई (LLM) में गोल्ड मेडलिस्ट रही हैं और उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा प्राप्त की है। वर्ष 2023 में उनका चयन सिविल जज के पद पर हुआ था।
         प्रखरश्री ने बताया कि उनके माता-पिता की इच्छा थी कि वह जज बनें, इसलिए उन्होंने मेहनत कर परीक्षा पास करके माता-पिता का सपना पूरा किया। हालांकि, उनका झुकाव बचपन से ही वैराग्य की ओर था। उनका मानना है कि जज या वकील बनकर वह समाज की सीमित सेवा कर पातीं, जबकि भगवान महावीर के बताए अहिंसा के मार्ग पर चलकर वह पूरे विश्व की सेवा कर सकती हैं।
       

विदित हो कि, प्रखरश्री स्वर्गीय आचार्य विद्यासागर महाराज से प्रभावित रही हैं और उन्होंने पूर्व में ही ब्रह्मचर्य का व्रत ले लिया था। वह आगामी 22 नवंबर को आधिकारिक तौर पर जैन दीक्षा ग्रहण कर सांसारिक जीवन का पूरी तरह त्याग कर देंगी। उनके इस फैसले का उनके परिवार और बैतूल के जैन समाज ने आत्मीय स्वागत किया। रविवार 1 नवंबर को बैतूल में उनके सम्मान में विंटेज कारों, शाही बग्घियों और उदयपुर के विशेष बैंड के साथ एक भव्य 'बिनौली चल समारोह' (शोभायात्रा) निकाला गया, जिसमें उन्हें नम आंखों से ऐतिहासिक विदाई दी गई।
प्रखरश्री के साथ चार अन्य युवतियां (जिनमें एक चार्टर्ड अकाउंटेंट भी शामिल हैं) भी इसी दिन संयम का मार्ग अपनाते हुए दीक्षा लेने जा रही हैं।
       उल्लेखनीय है कि, प्रखरश्री जैन के पिता जेके जैन भारतीय जीवन बीमा निगम के सेवानिवृत्त विकास अधिकारी हैं। उनके घर में शुरुआत से ही गहरा धार्मिक वातावरण था। प्रखरश्री ने CLAT परीक्षा पास करके अहमदाबाद से लॉ (LLB) की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने LLM में गोल्ड मेडल हासिल किया और उच्च शिक्षा के लिए प्रतिष्ठित लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स भी गईं। वर्ष 2016 में, अहमदाबाद में पढ़ाई के दौरान उनका झुकाव दिगंबर जैन संतों की ओर बढ़ा। उन्होंने प्रसिद्ध संत गणाचार्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से मुलाकात की और उनसे नियम लिए। इसके बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी होने तक ब्रह्मचर्य व्रत का पालन किया।
         प्रखरश्री हमेशा से वैराग्य चाहती थीं, लेकिन माता-पिता की इच्छा का सम्मान करने के लिए उन्होंने सिविल जज की तैयारी की और 2023 में जज के पद पर चयनित हुईं। माता-पिता का सपना पूरा करने के तुरंत बाद उन्होंने आजीवन संयम का मार्ग चुन लिया।
प्रखरश्री के साथ चार अन्य युवतियां भी सांसारिक जीवन का पूरी तरह त्याग करने जा रही हैं। सभी पांचों बहनें आगामी 22 नवंबर 2026 को जैन दीक्षा ग्रहण करेंगी।
        मुख्य जैनेश्वरी दीक्षा समारोह प्रसिद्ध जैन सिद्ध क्षेत्र सोनागिरि (मध्य प्रदेश) में आयोजित होगा। यह पावन समारोह गणाचार्य भगवान श्री विराग सागर जी महाराज और पदाचार्य श्री पदमसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद तथा गणिनी आर्यिका विशाश्री माताजी की छत्रछाया में संपन्न होने जा रहा है।
बैतूल में आयोजित हुए विदाई समारोह के बाद इन सभी दीक्षार्थियों की 'गोदभराई' की पारंपरिक रस्म जैन दादावाड़ी में पूरी की जा चुकी है, जहाँ समाज के लोगों ने इन्हें मंगल आशीर्वाद दिया।

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