शासन की सभी योजनाओं का लाभ जरुरतमंद ग्रामीणों को दिलाना मेरी पहली प्राथमिकता - युवा प्रत्याशी केसर सिंह

तहतक न्यूज/रायगढ़।
जिले में नगरीय निकाय और ग्राम-पंचायत चुनाव को लेकर जहाँ शहरों में मौसमी तापमान से कहीं ज्यादा चुनावी बुखार का पारा तेजी से चढ़ने लगा है तो वहीं ग्रामीण अंचलों में भी पंच व सरपंच पद को लेकर चुनावी सरगर्मियाँ शुरू हो गयी हैं। इसी क्रम में ग्राम-पंचायत लाखा में सरपंच पद के लिए युवा प्रत्याशी केसर सिंह की दावेदारी से युवाओं एवं ग्रामीण जनों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। सरपंच पद हेतु केसर कुमार सिंह को चुनाव चिन्ह "ताला और चाबी" मिला है जिसे लेकर प्रचार-प्रसार की तैयारियाँ शुरु हो गयीं हैं।


बता दें कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति बाहुल्य ग्राम लाखा पिछले कई सालों से मूलभूत सुविधाओं और शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित रहा है जबकि कई दशकों से यह पंचायत आरक्षित सीट रहा है। इस बार अनारक्षित मुक्त होने पर ग्राम वासियों की उम्मीदें बढीं हैं और वे चाहते हैं कि इस बार जो भी सरपंच हो वह शिक्षित, जुझारू, निडर और गाँव की समस्याओं को अधिकारियों और मंत्रियों के समक्ष बेझिझक रख सकने में सक्षम हो। यही वजह है कि वे अपनी मंशा के अनुरूप साफ-सुथरी छवि वाले जुझारू, बेबाक, स्पष्टवादी, शिक्षित, संवेदनशील और एक-दूसरे की मदद को तत्पर रहने वाले केसर कुमार सिंह को अपना सरपंच के रूप में देखना चाहते हैं।

वैसे तो लाखा पंचायत में सरपंच पद के लिए आठ उम्मीदवार हैं जिसमें केसर भले ही कम उम्र के प्रत्याशी हैं लेकिन जज्बा, उत्साह व ऊर्जा से भरपूर तथा मादक व्यसनों से दूर बेदाग छवि के सेवाभावी युवा प्रत्याशी हैं। इनकी यही योग्यता इनको सबसे अलग करती है। इनके समर्थकों की मानें तो पिछले कई दशकों से इस पंचायत को पुरुषों और महिलाओं ने चलाया है किन्तु गाँव के विकास की बात तो दूर, आज भी कई जरूरतमंद ग्रामीण निराश्रित पेंशन, वृद्धा पेंशन, राशन कार्ड तथा अन्य सुविधाओं के लाभ के लिए भटक रहे हैं। बीते कई सालों से आरक्षित सीट होने के बावजूद भी इस गाँव का जो विकास होना चाहिए था वह नहीं हो पाया। इस बार बदलाव की लहर है तो अब योग्य युवा को अवसर मिलना चाहिए।



सरपंच प्रत्याशी केसर कुमार सिंह ने ग्राम की वर्तमान स्थिति पर विचार प्रकट करते हुए बताया कि विस्थापित ग्राम लाखा के निवासियों को केलो परियोजना द्वारा लगभग 70 एकड़ की जमीन बसाहट के लिए दी गयी जिसमें 400 से अधिक प्लाट और गलियाँ हाईवे रोड के बराबर हैं। यहाँ योजना अनुसार उप स्वास्थ्य केंद्र, पुलिस चौकी, बाजार, आदि सब कुछ दिखाई देते हैं। बाहर दूर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे यह कोई आधुनिक और हाईटेक स्मार्ट ग्राम है लेकिन अंदर से उतना ही पिछड़ा हुआ है। शिक्षा, स्वास्थ्य, स्थायी रोजगार, आवास, स्ट्रीट लाईट, नालियों की सफाई, तालाब, पर्यावरण जैसी मूलभूत सुविधाएं बुरी तरह से चरमराई हुई हैं। कई पात्र हितग्राहियों को राशन, वृद्धा पेंशन, निराश्रित पेंशन जैसी आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। यदि जनता मुझे जनादेश देती है तो शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अन्तिम छोर के ग्रामीण तक पहुँचाना मेरी पहली प्राथमिकता होगी। इसके अलावा डूबान में मिलने वाली मुआवजा की बची हुई राशि विस्थापितों को दिलवाने का भरपूर प्रयास करूँगा।

ग्राम-पंचायत लाखा के अनारक्षित मुक्त घोषित होने के बाद इस बार का चुनाव बेहद रोचक हो गया है। ग्रामीण मतदाताओं के मन में जहाँ उत्सुकता और बदलाव की सोच देखी जा रही है तो वहीं प्रत्याशी भी अपना-भाग्य आजमाने में लगे हैं और लोगों को रिझाने की कोशिश कर रहे हैं। बात तह तक की करें तो जनता-जनार्दन इतना जागरूक हो चुकी है कि अब वह किसी के बहकावे और लालच में नहीं आने वाली और वो अपना कीमती वोट योग्य प्रत्याशी को देकर अपने और अपने गाँव के विकास में उचित फैसला करेगी।

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