शकुंतला गोदाम में हादसा, लोडिंग के दौरान हमाल के टूटे दोनों पैर , 17 दिन बाद भी मुआवजे का इंतजार


💥पीड़ित ने लगाया आरोप: इलाज का आश्वासन देकर मुकरा प्रबंधन, अब कलेक्टर और श्रम विभाग से न्याय की उम्मीद।

तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। मेहनत, मेहनत होता है चाहे सरकारी हो या निजी। मजदूर का पसीना उतना ही बहता है। अंतर इतना है कि जब वह किसी हादसे का शिकार हो जाता है तो शासकीय कर्मचारी को लाखों का भरपायी मिलता है और निजी मजदूर को इलाज तक का पैसा मिलना मुश्किल हो जाता है। ऐसी ही एक चिन्ताजनक घटना की तस्वीर सामने आयी है जिसमें एक घायल गरीब मजदूर आर्थिक सहयोग की उम्मीद में बिस्तर पर पड़ा है।
      विश्ववस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उड़ीसा रोड स्थित शकुंतला गोदाम में 16 अक्टूबर 2026 को ट्रक में खरी लोडिंग के दौरान 32 वर्षीय हमाल राकेश कुमार कुर्रे के गिर जाने से दोनों पैर टूट गए। मेडिकल दस्तावेजों और एक्स-रे रिपोर्ट में दोनों पैरों में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई है। पीड़ित ने काम के दौरान सुरक्षा उपकरण न मिलने और उचित मुआवजा न मिलने का गंभीर आरोप लगाया है।
      

पीड़ित की मानें तो, अनिल केडिया निवासी लाल टंकी की ओर से 6 हमालों को बुलाया गया था। 600 बोरी लोड होने के बाद आखिरी छल्ली लगाते समय ट्रक का डाला दबाव से बाहर निकल गया। मौके पर मौजूद मुंशी ने उसे ऊपर चढ़कर बत्ता लगाने को कहा। आरोप है कि बिना सुरक्षा उपकरण के काम करवाते समय नीचे से रस्सी खींचने से हमाल राकेश कुमार का संतुलन बिगड़ा और वह जमीन पर गिर गया। आनन-फानन में घायल को फटहामुड़ा स्थित क्लिनिक ले जाया गया। पीड़ित का आरोप है कि वहाँ मुंशी ने सेठ द्वारा पूरा इलाज खर्च उठाने का आश्वासन दिया और किसी को न बताने को कहा, लेकिन बाद में वापस नहीं आया। अगले दिन जिला चिकित्सालय में प्लास्टर किया गया, जहाँ उसे 3 माह पूर्ण आराम की सलाह दी गई है।
        उल्लेखनीय है कि, पीड़ित अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला है। परिवार में पत्नी, मां, भतीजे और छोटे बच्चे सहित 7 सदस्य हैं। बड़े भाई के निधन के बाद उनके बच्चों की जिम्मेदारी भी उसी पर है। 17 दिन बीत जाने के बाद भी आर्थिक मदद न मिलने से परिवार पर रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उधारी से इलाज चल रहा है। अब पीड़ित जूटमिल थाना, एसपी, श्रम विभाग और कलेक्टर को लिखित शिकायत देकर जाँच, सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित करने और नियमानुसार क्षतिपूर्ति की मांग करेगा।
        बहरहाल, अब देखना यह है कि श्रमिक हितों के लिए कृत संकल्प छत्तीसगढ़ सरकार के दरबार में पीड़ित को क्या कुछ न्याय मिलता है?  बता दें कि, यह खबर पीड़ित के बयान, वीडियो और चिकित्सकीय दस्तावेजों के आधार पर है और इस संबंध में अनिल केडिया और शकुंतला गोदाम प्रबंधन का पक्ष सामने नहीं आया है।

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