अडानी के मंसूबों पर पानी फेरने खिलाफत में उतरे ग्रामीण, लामबंद हुए ग्रामीणों की चल रही लगातार बैठकें  

💥जनता जनार्दन के दरबार में सुलग रही विरोध की चिंगारी।
💥अडानी का अजगर पूरे रायगढ़ जिले को कर रहा लीलने की तैयारी।
💥अडानी पॉवर लिमिटेड का होने जा रहा विस्तार।
💥2200 मेगावाट में तो ये हाल, 3800 मेगावाट में हो जायेंगे बेहाल।

तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। जिले में प्रदूषण का बाढ़ अपने पूरे उफान पर है। प्रदूषण का जल स्तर खतरे के निशान से कई मीटर ऊपर बह रहा है। न जाने कितने लोग खतरनाक बिमारियों की धार में बह गए, लेकिन कृत्रिम आपदा बचाव केंद्र पर्यावरण मण्डल जहर भरी काली घटाएं पैदा करने वाले कॉर्पोरेट जगत के घटोत्कचों को न्योता ऊपर न्योता दे कम्बल ओढ़कर घी पीने में व्यस्त है। जनता जल बिन मछली की तरह शुद्ध ऑक्सीजन लेने के लिए तड़प रही है। पर्यावरण को लेकर चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ है। पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी लिए पद में बैठे नेता मुंगेरीलाल के हसीन सपने देखने में डूबे हुए हैं। जिस तरह सावन के अंधे को हरा ही हरा सूझता है वैसे ही देश के कर्णधारों को हमेशा विकास ही विकास सूझ रहा है, हो रहे विनाश के बारे में तो कोई सोच भी नहीं रहा है। लोग त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रहे हैं, उसके बावजूद भी विनाश को और विस्तार दिया जा रहा है।
        बता दें कि, पर्यावरण के दुश्मनों द्वारा जिले में  औद्योगिक विस्तार की फिर एक और नयी कहानी गढ़ी जा रही है। अदानी पावर लिमिटेड अपने 2200 मेगावाट ताप विद्युत संयंत्र से संतुष्ट नहीं है। सुरसा के मुख की तरह मुँह खोलते हुए 1600 मेगावाट की दो नई अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल इकाइयों के विस्तार का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। परियोजना के अनुसार विस्तार के बाद संयंत्र की कुल क्षमता 3800 मेगावाट हो जाएगी। इसके लिए 185 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि, प्रतिवर्ष 6.67 मिलियन टन अतिरिक्त कोयला और 32 एमसीएम अतिरिक्त पानी की आवश्यकता होगी, जबकि करीब 2.66 मिलियन टन अतिरिक्त फ्लाई ऐश भी उत्पन्न होगी।
        इस परियोजना के दस्तावेजों में फ्लाई ऐश का 100 प्रतिशत निपटान और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उसका सुरक्षित प्रबंधन सुनिश्चित किये जाने का उल्लेख है, लेकिन रायगढ़ की वास्तविक सच्चाई इन दावों को हास्यास्पद निरुपित करती है। हकीकत की तहकीकात में तहतक जाकर देखें तो जिले के कई क्षेत्रों में सड़क किनारे, जंगलों, नालों और निजी जमीनों में फ्लाई ऐश के ढेर देखने को मिल जायेंगे। बारिश के पानी में यही राख बह कर खेतों और नदी-नालों में पहुँच कर जहाँ जल को दूषित करते हैं, वहीं मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी प्रभावित करते हैं। यही नहीं, फ्लाई ऐश हवा में उड़ती है तो त्वचा, आँखों में जलन और साँस सम्बन्धी समस्याएं भी उत्पन्न करती हैं।
           ऐसे में संयंत्र की क्षमता को बढ़ाये जाने से जाहिर है कि प्रदूषण और बढ़ जायेगा। 2.66 मिलियन टन फ्लाई ऐश का अतिरिक्त बोझ बढ़ जायेगा। वर्तमान में जो फ्लाई ऐश उत्पन्न हो रहा है उसका निपटान तो नियमानुसार नहीं कर पा रहे हैं। चोरी-छिपे जहाँ-तहाँ डंप कर दिया जा रहा है, ऐसे में 2.66 मिलियन टन फ्लाई ऐश खपाएंगे कहाँ ?
         जिले में स्थापित उद्योगों की जनसुनवाईयों में फ्लाई ऐश के शत-प्रतिशत उपयोग के लिए ईंट निर्माण के दावे किये गए थे, लेकिन विडंबना है कि अपवाद स्वरुप एक-दो को छोड़ शायद ही कोई प्लांट ईंट बना रहा होगा।
       उल्लेखनीय है कि, प्रोजेक्ट में कोयला और जल की आवश्यकता भी बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर परिवहन और जल संसाधनों पर भी पड़ेगा। रायगढ़ की जनता पहले से ही लौह कारखानों, कोयला खदानों, ताप विद्युत संयंत्रों और अन्य भारी उद्योगों से त्रस्त है। ऐसे में किसी भी नए विस्तार से पहले ही जिले की जनता अलर्ट मोड पर है और अडानी पॉवर लिमिटेड के विस्तार का पूरजोर विरोध करने की तैयारी कर रही है। अडानी कंपनी के विस्तार को लेकर छोटे भंडार, बड़े भंडार, कोतमरा, सरवानी, बरपाली तथा आसपास के कई गांवों के ग्रामीण महिलाओं और पुरुषों का बैठकों का दौर लगातार जारी है। वहीं, मुड़ागांव पेड़ कटाई मामले में चर्चा में आये अडानी के खिलाफ पूरे जिले की जनता में गरमागरम बहस चल रही है।
         बहरहाल, रायगढ़ में प्रस्तावित रूंगटा स्टील प्राइवेट लिमिटेड की जनसुनवाई भारी जन विरोध के बाद रद्द होने से लोगों की उम्मीद बढ़ गयी है। जनता चाहती है कि जिले में अब और प्रदूषण न बढ़े।

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