💥 आबंटन जमीन की अवैध खरीद-बिक्री एवं दर्जनों पेड़ों की कटाई करने का गंभीर मामला।
तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। एक मात्र पेड़-पौधे ही हैं जो प्रदूषण को अपने में समेटने की क्षमता रखते हैं, लेकिन इसकी भी एक सीमा होती है। जब सीमा से अधिक प्रदूषण फैलने लगे तो ये पेड़-पौधे भी अपनी क्षमता खो बैठते हैं और फलना-फूलना तो दूर मरने की कगार पर चले जाते हैं। कुछ ऐसी ही हालत रायगढ़ जिले के जंगलों की हो गयी है। बचे-खुचे जंगल कराह रहे हैं। वन्य पशु खासकर हाथियों का स्वतंत्र जीवन बाधित हो रहा है। आये दिन हाथी-मानव द्वन्द की खबरें लगातार सामने आ रही हैं फिर भी देश व क्षेत्र की तरक्की के नाम पर जंगलों का सफाया हो रहा है और एक पेड़ माँ के नाम पौध-रोपण कर खुद को तसल्ली देकर बचकाना हरकत किया जा रहा है। ऐसे में भयंकर जहरीले प्रदूषण से जूझ रहे रायगढ़ जिले के लिए एक और बुरी खबर सामने आयी है, जिसमें अपने-आपको आम नागरिकों का नेता कहलाने वाला कथित समाजसेवी और व्यवसाय की आड़ में ग्राहकों को बेवकूफ बनाकर पैसे वसूलने वाला एक व्यक्ति ने व्यवसायिक गतिविधियों के लिए "आवंटित भूमि" की अवैध खरीदी कर उसमें लगे हरे-भरे पेड़ों को निर्दयता पूर्वक जड़ से उखाड़ फेंकने का एक गंभीर अपराध किया है। एक चिड़ीमार के ऊपर कड़ी कार्रवाई करने वाले कर्त्तव्यनिष्ठ वन विभाग के रहते बरसों पुराने अनेकों वृक्षों को जड़ से उखाड़ फेंकने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल उठता है कि आखिर इतना बड़ा खेल कैसे हो गया?

बता दें कि जिले में 'बड़े झाड़ जंगल' की आवंटित सरकारी जमीन की अवैध रूप से खरीद-बिक्री करने और नियमों को ताक पर रखकर अनेकों पेड़ों की कटाई करने के गंभीर मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। इस पूरे विवाद में भाजपा नेता व जमीन कारोबारी दीपक डोरा की भूमिका प्रमुखता से चर्चा में है। रायगढ़ एसडीएम ने इस मामले में दीपक डोरा की कंपनी बालाजी बिल्डकॉन समेत चार लोगों को कारण बताओ नोटिस थमाया है। प्रशासन ने इस जमीन सौदे और अवैध पेड़ कटाई के गंभीर मामले में दीपक डोरा सहित सभी संबंधित पक्षों से 28 अक्टूबर 2026 तक जवाब तलब किया है।
जानकारी के अनुसार, सम्बलपुरी क्षेत्र में स्थित 'बड़े झाड़ जंगल' (एक प्रकार की आरक्षित/सरकारी भूमि) की जमीनों की हेराफेरी कर उन्हें बेचने और वहाँ धड़ल्ले से पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करते हुए पेड़ काटने के आरोपों के बाद यह जाँच व नोटिस की कार्रवाई की गई है। जाँच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन द्वारा जिन अन्य लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है, उनके नाम इस प्रकार हैं-
1. मंगल सिंह पिता भुजबल - यह मूल आवंटित भूमि इन्हीं के नाम पर थी, जिसके चार टुकड़े कर बेचे जाने की बात सामने आई है।
2. पार्वती देवी
3. लेखा लाठ
4. प्रद्युम्न लाठ (झारसुगुड़ा निवासी खरीदार)
विदित हो कि यह सात एकड़ जमीन राजस्व दस्तावेजों में 'बड़े झाड़ जंगल' (शासकीय भूमि) के रूप में दर्ज थी। नियमों के मुताबिक इसे बेचा नहीं जा सकता था, लेकिन जमीन को टुकड़ों में बांटकर बालाजी बिल्डकॉन (जिसमें दीपक कुमार अग्रवाल/दीपक डोरा की भूमिका है) को हस्तांतरित कर दिया गया। इसके बाद वहाँ बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की गई, जिसके बाद प्रशासन ने इन सभी पक्षों को तलब किया है।
रायगढ़ के सम्बलपुरी क्षेत्र में 'बड़े झाड़ जंगल' की सरकारी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री और प्रतिबंधात्मक पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के इस गंभीर मामले में कलेक्टर और राजस्व विभाग (प्रशासन) ने बहुत ही सख्त रुख अपनाया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित तिथि तक संतोषजनक और वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, तो एकपक्षीय कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
भू-माफियाओं द्वारा बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के दर्जनों (कुछ स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार सैकड़ों) प्रतिबंधित पेड़ों को काटने के मामले में राजस्व विभाग वन विभाग के साथ मिलकर पेड़ों के मूल्यांकन और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने के एवज में भारी जुर्माना लगाने की तैयारी में है।
प्रशासन इस मामले को पूरी तरह से अवैध भू-हस्तांतरण मानकर चल रहा है और जवाब मिलने के बाद जमीन के आवंटन को निरस्त करने और इसे दोबारा पूरी तरह से शासकीय घोषित करने जैसी सख्त दंडात्मक कार्रवाई की ओर बढ़ सकता है।



