तहतक न्यूज/जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़। मानव समाज कितना भी शिक्षित और जागरूक हो जाय लेकिन जमीन विवाद के मामले में न जाने क्यों वह जानवर से भी बदतर हो जाता है। प्राचीन काल से ही इंसान खून-खराबा करता आ रहा है और आज इतने सख्त कानून और सजा के बावजूद भी उसमें कहीं कोई खौफ या भय नहीं है। ऐसे ही एक रूह कंपा देने वाली घटना की तस्वीर जिले के ग्राम भंवतरा से सामने आयी है, जिसमें जमीन विवाद के चलते एक कलयुगी बेटे ने अपने ही परिवार के चार लोगों की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी। महज 40 डिसमिल जमीन और 8 लाख रुपए के झगड़े में हुई इस वारदात से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। पुलिस ने घटना के 6 घंटे के अंदर आरोपी और उसके बेटे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार रात आरोपी सोनसाय कश्यप ने अपने पिता मेदनीराम कश्यप 70 वर्ष, मां कांति बाई 65 वर्ष, 17 वर्षीय भतीजे पीताम्बर और 25 वर्षीय भतीजी मोगरा पर टांगी से ताबड़तोड़ हमला कर मौत के घाट उतार दिया। बताया जा रहा है कि सभी लोग निर्माणाधीन मकान में गहरी नींद में सो रहे थे, तभी आरोपी ने अपने बेटे के साथ मिलकर इस नृशन्स हत्या को अंजाम दिया।
दूसरे दिन सुबह जब निर्माणाधीन मकान में काम करने वाला मिस्त्री पहुंचा तो वहाँ का दृश्य देखकर उसके होश उड़ गए। आँगन में चार लोगों की खून से लथपथ लाशें पड़ी थीं। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची और जाँच शुरू कर दी। जाँच में पता चला कि जमीन और पैसों के विवाद को लेकर आरोपी अपने पिता से नाराज था। इसी रंजिश में उसने अपने बेटे के साथ मिलकर पूरे परिवार को खत्म करने की योजना बनाई और वारदात को अंजाम दिया। पुलिस जाँच और पूछताछ में यह भी बात सामने आयी कि पंद्रह-सोलह साल पहले अपने ही सगे भाई की हत्या के आरोप में सजा काट कर आया था और आये दिन अपने पिता से झगड़ा करता था। परेशान होकर पिता ने पुलिस में शिकायत भी की थी जिससे रंजिश और बढ़ता गया तथा मौका मिलते ही उसने उसी मृत भाई के पुत्र व पुत्री सहित माता-पिता की हत्या कर दी। पुलिस ने जांच और पूछताछ के आधार पर कुछ ही घंटों में आरोपी सोनसाय और उसके बेटे गोलू को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।
बहरहाल, इस तरह के बढ़ते जघन्य अपराधों को देखते हुए लोगों में दहशत और चिंता का माहौल बन गया है। बात तहतक की करें तो इतिहास गवाह है कि जर, जोरू और जमीन को लेकर इस दुनिया में बड़े-बड़े कांड हुए हैं और इसका परिणाम भी भयानक हुआ है, फिर भी अहंकार में डूबा लालची इंसान हैवानियत की हदें पार करने से नहीं चूक रहा है। ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाने शासन और कानून के अलावा बुद्धिजीवियों, सामाजिक संस्थाओं और संगठनों को पहल करने की नितांत आवश्यकता है।


