तहतक न्यूज/ मेरठ,उत्तर प्रदेश। मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने देश को झकझोर देने वाले बहुचर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को जुर्माने के साथ फांसी की सजा (मृत्युदंड) सुनाई है।
डिस्ट्रिक्ट जज अरविंद कुमार मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए महाभारत और गीता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि "धर्म का अर्थ गलत काम करने वालों को सजा देना भी है," इसलिए अदालत अपना कर्तव्य निभा रही है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने जब बुधवार को दोनों को सजा सुनाई तो कोर्ट में भारत माता की जय के नारे लगे। वकीलों ने कहा कि यह सजा अपराधियों के लिए एक संदेश है। दोनों को जो सजा सुनाई है, उसके मुताबिक मुस्कान-साहिल को तब तक फंदे पर लटाया जाना है, जब तक उनकी मौत न हो जाए। इस जघन्य मामले में न्याय दिलाने के लिए 13 महीने के भीतर 126 सुनवाइयां हुईं और करीब 22 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए। कोर्ट ने इन्हें 30 सितंबर को ही दोषी करार दे दिया था।

उल्लेखनीय है कि पीड़ित सौरभ राजपूत की माँ और भाई इस फैसले से पूरी तरह संतुष्ट हैं। वहीं, चौंकाने वाली बात यह रही कि मुस्कान के अपने माता-पिता ने भी लिखित बयान देकर उसकी फांसी की सजा का विरोध करने से इनकार कर दिया है।
क्या था 'नीला ड्रम' हत्याकांड ?
यह घटना मार्च 2025 की है। मर्चेंट नेवी के पूर्व अधिकारी सौरभ राजपूत की शादी मुस्कान से हुई थी, लेकिन मुस्कान का अपने पुराने सहपाठी साहिल शुक्ला के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था। अपने रास्ते से हटाने के लिए मुस्कान और साहिल ने मिलकर सौरभ की बेरहमी से हत्या कर दी। इसके बाद शव को छिपाने के लिए उसके टुकड़े किए और घर में ही एक नीले ड्रम में डालकर उसे सीमेंट से भर दिया। अगले ही दिन पुलिस ने इस खौफनाक वारदात का खुलासा किया था।
सजा के बाद जेल का माहौल
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट की कार्रवाई से जुड़े मुस्कान और साहिल फांसी की सजा सुनते ही फूट-फूटकर रोने लगे। मेरठ की चौधरी चरण सिंह जिला कारागार के अधिकारियों के मुताबिक, दोनों गहरे सदमे में हैं और उन्होंने रात का खाना भी नहीं खाया। जेल के नियमों के तहत अब उन्हें कैदी नंबर दे दिया गया है और वे सामान्य कपड़ों की जगह सफेद रंग के जेल के कपड़ों में रहेंगे। दोनों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरों और बंदी पहरेदारों से लगातार निगरानी की जा रही है।
नीले ड्रम हत्याकांड में आये इस फैसले के बाद अब लोगों के मन में सवाल ये है कि आखिर उन्हें ये सजा दी कब जाएगी? दरअसल, फांसी की सजा सुनाए जाने से सजा दिए जाने तक एक लंबी प्रक्रिया होती है। ऐसे में मुस्कान ओर साहिल को फांसी की सजा दिए जाने का नंबर कब तक आएगा ये तय नहीं है। मुस्कान और साहिल से पहले भी कई लोग फांसी का इंतजार कर रहे हैं।
मुस्कान-साहिल के पास कई विकल्प
मुस्कान और साहिल के पास भी फांसी की सजा से बचने के कई रास्ते है. दरअसल निचली अदालत द्वारा सुनाए गए फांसी की सजा के किसी भी मामले को हाईकोर्ट की पुष्टि के बिना पूरा नहीं किया जा सकता। यानि, मामला हाईकोर्ट तक जाना ही है और यहाँ दोबारा साक्ष्यों की जाँच होगी। हाईकोर्ट की ओर से पुष्टि होने के बाद ही फांसी का रास्ता साफ होगा। उसके बाद दोषी यदि सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करता है तो वहाँ फिर से मामले की सुनवाई होगी, अगर वहाँ से भी सजा की पुष्टि कर दी जाती है तो फिर दोषियों के पास दयायाचिका का एक और विकल्प रह जाता है। ऐसे में मुस्कान और साहिल को सजा मिल पाने में काफी वक्त लग सकता है।



