तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। जिले में प्रदूषण और उससे होने वाली बिमारियों ने आम जनता के ऊपर इस कदर हायतौबा मचा रखी है कि इसे रोक पाने के लिए शक्ति संपन्न शासन-प्रशासन भी बेबस और लाचार प्रतीत हो रहा है। यही वजह है कि जिम्मेदारों से नाउम्मीद हो चुके लोग अब संकट की घड़ी में संकटमोचन भगवान हनुमान के शरण में जाकर अर्जी-विनती कर रहे हैं। यह तो सर्व विदित है कि भूत, पिशाच, भय और अन्य संकट से मुक्ति के लिए हनुमान चालीसा का पाठ सर्वोत्तम माना गया है और अब जब लोगों को मानव निर्मित प्रदूषण जैसे चीज से मुक्ति पाने के लिए हनुमान चालीसा का सहारा लेना पड़ रहा है तो निश्चित ही प्रदूषण को भूत-प्रेतों की श्रेणी में रखा जाना कोई गलत नहीं होगा। यही कारण है कि लोग सरकार की दरबार से निराश होकर अब भगवान के दरबार में जाना उचित समझ रहे हैं।
बता दें कि पूजा और प्रार्थना के लिए स्थानीय लोग स्वेच्छा से धीरे-धीरे आपस में एकजुट होकर रायगढ़ के भलाई के लिए हनुमान जी से निरंतर निवेदन कर रहे हैं। इसी क्रम में अब बच्चे भी अपनी परेशानी व समस्याओं के समाधान के लिये इस कार्यक्रम में शामिल होकर गुहार लगा रहे हैं।
विदित हो कि रायगढ़ शहर के वार्ड नंबर 30 कैदीमुड़ा में चल रहे कार्यक्रम के लगातार तीसरे सप्ताह के हनुमान चालीसा पाठ और प्रार्थना कार्यक्रम में इस मंगलवार बच्चों ने पोस्टर में लिखकर सभी उपस्थित जनों के बीच बताया कि अब हम छोटे-छोटे बच्चों की हनुमान से विनती है कि ‘हमे दमा और सांस की बीमारी से बचाओ और फैक्ट्री के प्रदूषण को खत्म करो’।
इन बच्चों की प्रार्थना में मोहल्लेवासियों में जय यादव, राहुल श्रीवास, विनोद साहू, दुर्गेश यादव, राजेश निषाद, कौशल सिंह ठाकुर, तुषार कन्नौजिया, मोनू प्रधान, गुलशन साव, मनीष मेहर, नानू यादव, अनिल निषाद, विशाल निषाद, दिव्यांशु, जय सिंह, चंद्रशेखर, नीलकंठ साहू सहित बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुषों की भी उपस्थिति रही।
'रायगढ़ बचाओ-लड़ेंगे रायगढ़' के विनय शुक्ला ने बताया कि 7 बिंदुओं को लेकर चरणबद्ध चल रहे प्रत्येक मंगलवार को रायगढ़ के अलग-अलग स्थान के हनुमान मंदिरों में संकट मोचन की चालीसा का पाठ और प्रार्थना कार्यक्रम निरंतर जारी है, जो आम लोगों के लिए किसी भी तरह रायगढ़ को सड़क दुर्घटना, प्रदूषण, बेरोजगारी, महंगी शिक्षा, अवस्थित सरकारी अस्पताल, गंदे पेयजल, अव्यवस्थित भवनों जो खंडहर में बदलते सरकारी कॉलेज और स्कूलों से निजात दिलवाने के लिए प्रयासरत है।
शहर में हो रहे इस तरह के अनोखे कार्यक्रम में बात तहतक की करें तो जो वास्तविकता सामने आ रही है उससे यही लगता है कि पूरे सिस्टम से आम जनता का भरोसा उठ गया है। ज्ञापन, धरना, रैली, विरोध प्रदर्शन से थक हार कर लोग अब भगवान के शरण में जा रहे हैं। यही नहीं, मासूम बच्चे तक पोस्टर लगाकर याचना करते नजर आ रहे हैं। सवाल उठता है कि लोकतान्त्रिक देश में इस प्रकार की नौबत क्यों आ रही है? जनता में सुख शांति के बजाय भय और चिंता का माहौल क्यों है?


