💥 गोवर्धनपुर मार्ग की बदहाली से जनता परेशान, जानलेवा गड्ढों से जूझ रहे दुपहिया चालक।
💥गोवर्धनपुर-रामपुर-ऐश्वर्या कॉलोनी तक सड़क बना तालाब।
💥 ठोस निर्माण नहीं, केवल पैचवर्क कर हो रही लीपापोती।
तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। कहते हैं गाँव हो शहर, समृद्धि और विकास का प्रमाण वहाँ की चमचमाती सड़कें होती हैं, लेकिन ऐसी सड़कें कम ही देखने को नसीब होती हैं। जिले में कथित विकास का ढिंढोरा कितना भी पीटा जाय, परन्तु बारिश आते ही जनता-जनार्दन के मुसीबतों का पिटारा खुलने की जो तस्वीरें सामने आती हैं, उससे जिम्मेदार विभागों के ऊपर कई सवाल उठने लगते हैं।
विदित हो कि रायगढ़ शहर का गोवर्धनपुर मार्ग इन दिनों अपनी बदहाली पर खून के आंसू रोने को मजबूर है। कमजोर रखरखाव और ओवरलोड वाहनों के भारी दबाव के कारण यह सड़क पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है। सड़क पर जगह-जगह जानलेवा गड्ढे बन चुके हैं, जिनमें फंसकर दोपहिया वाहन चालक आये दिन चोटिल हो रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पैचवर्क के नाम पर गड्ढों में मामूली मिट्टी-गिट्टी भर कर खानापूर्ति कर दी जाती है। इससे सड़क पर उड़ने वाली धूल से आसपास के दुकानदार और रहवासी को जहाँ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझना पड़ता है वहीं, पहली ही बारिश में भारी वाहनों के गुजरने से उखड़ जाने वाली इस सड़क में आम राहगीरों को चलने में कई कठिनाइयों और हादसों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूली बच्चे यहाँ अपनी जान हथेली पर लेकर विद्यालय आने-जाने को मजबूर हैं।
जनता और स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रशासन से इस मार्ग को नए सिरे से पक्का और मजबूत बनाने की पुरजोर मांग की जा रही है, ताकि क्षेत्र के लोगों को इस नारकीय जीवन से मुक्ति मिल सके। फिलहाल, अब देखना यह है कि लोगों के इस जरुरी माँग पर कब तक इस जर्जर मार्ग का उद्धार हो पाता है?
बात करें तहतक की तो पक्की सड़क निर्माण की माँग अक्सर बरसात के मौसम में ही उठती है और जिम्मेदार विभाग को वही पुराना रटा-रटाया शब्द 'बारिश में ठोस व पक्की सड़क बनाना नामुमकिन है' जैसा जवाब देने का अवसर मिल जाता है। फिर शुरू हो जाता है वही ढर्रा बार-बार मरम्मत कराने का। इस मरम्मत में खर्च ही इतना कर दिया जाता है जितने में एक नयी सड़क बन जाती। अब सवाल यही उठता है कि बरसात में बारम्बार मरम्मत करने के बजाय ठंड या गर्मी के दिनों में एक ही बार में ठोस निर्माण क्यों नहीं कर दिया गया? यदि, समय रहते कर दिया गया होता तो आज आम नागरिकों को कम से कम इतनी भारी मुसीबत तो नहीं झेलनी पड़ती।



