तहतक न्यूज/धरमजयगढ़-रायगढ़, छत्तीसगढ़। एक तरफ जहाँ ईंधन संकट और अघोषित आर्थिक नाकेबंदी के बीच लोग परेशान हो रहे हैं, वहीं धरमजयगढ़ ब्लॉक के हाटी में पेट्रोल पंपों पर निजी कंपनियों या बाहरी वाहनों द्वारा ड्रमों में डीजल ले जाने और भारी मात्रा में स्टॉक करने की खबरें सामने आई हैं, जिसके बाद प्रशासन ने कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त जांच अभियान शुरू किया है।
जानकारी के मुताबिक एक निजी कंपनी को लगभग 600 लीटर डीजल ड्रम में उपलब्ध कराया गया। इस घटना के बाद ग्रामीणों और आम उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। क्षेत्र के कई पेट्रोल पंपों में डीजल-पेट्रोल की कमी बनी हुई है। कई जगहों पर सीमित मात्रा में ईंधन दिया जा रहा है। ऐसे समय में एक ही ग्राहक को भारी मात्रा में डीजल दिए जाने पर सवाल उठने लगे हैं।
लोगों का कहना है कि आम नागरिकों को घंटों लाइन में लगने के बावजूद पर्याप्त पेट्रोल या डीजल नहीं मिल पा रहा है, जबकि निजी कंपनियों को खुलेआम ड्रमों में डीजल दिया जा रहा है। इस सम्बन्ध में इंद्रा पेट्रोल पंप की संचालिका ने सफाई देते हुए कहा कि संबंधित एमईसीएल कंपनी उनका पुराना ग्राहक है और वह हमेशा उनके पंप से ही डीजल लेती है। इसी वजह से कंपनी को ड्रमों में डीजल उपलब्ध कराया गया। वहीं स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब पूरे क्षेत्र में ईंधन संकट गहराया हुआ है, तब किसी एक कंपनी को प्राथमिकता देना आम जनता के साथ अन्याय है।
उल्लेखनीय है कि ईंधन संकट का असर अब ग्रामीण इलाकों में भी नजर आने लगा है। डीजल की कमी के कारण जहाँ यातायात प्रभावित हो रहा है, वहीं माल ढुलाई महंगी होने लगी है और जरुरत के सामानों के कीमतें भी बढ़ने लगी हैं। किसान, मजदूर, छात्र और छोटे व्यापारी भी संकट झेल रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, प्रशासन ने पंपों की बिक्री और स्टॉक की जांच शुरू कर दी है। अनाधिकृत रूप से ड्रमों में डीजल/पेट्रोल की कालाबाजारी करने वाले या तय मात्रा से अधिक ईंधन बेचने वाले पंपों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें सील किया जा रहा है। ईंधन संकट और इस तरह के हालातों में आम लोगों और जरूरी सेवाओं के लिए भी नियम तय किए गए हैं, जिसके तहत ड्रमों या बैरलों में तेल केवल अस्पताल और आपातकालीन सेवाओं के लिए ही अधिकृत लाइसेंस के जरिए उपलब्ध कराने का प्रावधान है।


