वजरॉन कंपनी की नजर में मजदूर की जान की कीमत चंद रुपयों के सिवा कुछ भी नहीं

तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। पूँजीपथरा थाना  क्षेत्रान्तर्गत चिराईपानी-पाली मार्ग में स्थित वजरॉन कंपनी में उस समय हड़कम्प मच गया जब मृतक के परिजनों ने सड़ी-गली लाश को मेनगेट के सामने रख मुआवजे और नौकरी की माँग करने लगे। साथ में मृतक की पत्नी और दो नन्हें बच्चे भी मौजूद थे।


           मृतक के रिश्तेदार ने बताया कि मृतक हेमसागर रात्रे पिता संतोष कुमार रात्रे उम्र 28 वर्ष निवासी ग्राम तनौद जिला जांजगीर-चाम्पा पिछले सात/आठ माह से वजरॉन कंपनी में ठेकेदार सूर्यकान्त पांडे के ठेके पर कार्य करता था। आगे उसने बताया कि मृतक हेमसागर बीते 27 फरवरी से गायब था। ठेकेदार तथा कंपनी के तरफ से भी उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गयी। काफी खोजबीन के बाद नहीं मिलने पर थाना पूँजीपथरा में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।  आखिरकार 13 मार्च को पुलिस ने सूचना दी कि जंगल के भीतर एक पेड़ पर लटकती सड़ी-गली लाश मिली है। परिजनों ने उसके कपड़े और चप्पल को देख हेमसागर के रूप में शिनाख्त की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हेमसागर ने आत्महत्या नहीं की है बल्कि उसकी हत्या कर गैस कटर की रबर पाइप से फाँसी का फंदा लगा कर पेड़ पर लटका दिया गया था। उसके हाथ में दस्ताने भी लगे हुए थे।
        बता दें कि मृतक हेमसागर का शव इतना खराब हो चुका था कि पोस्टमार्टम के लिए शव को अस्पताल ले जाना नामुमकिन था अतः मौके पर ही शव का पोस्टमार्टम करा अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया गया।
मृतक अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला था। उसकी पत्नी के अलावा दो मासूम बच्चे भी हैं जिनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए छीन गया। अनाथ बच्चों की अंधकारमय भविष्य और उनके परवरिश को लेकर परिजनों ने आज सुबह सात बजे से वजरॉन कंपनी के गेट के समक्ष शव को रख कर दस लाख रूपये मुआवजा और नौकरी की माँग की। इस दौरान ठेकेदार सूर्यकान्त पांडे मौके से नदारद था। आठ घंटे धरना प्रदर्शन के बाद आखिरकार कंपनी प्रबंधन ने घुटने टेके और मुआवजा के रूप में पाँच लाख रूपये देने की बात कही। परिजन मानने को तैयार नहीं थे और अपनी माँग पर अड़े हुए थे। अंत में ग्राम पंचायत लाखा के सरपंच इंद्र कुमार पंडा के हस्तक्षेप और समझाईस पर तत्काल दो लाख रूपये देने और क्रियाकर्म पश्चात् तीन लाख रूपये के अलावा शेष राशि के लिए ठेकेदार के साथ बैठक कर बात करने की लिखित में आश्वासन दिया गया।
           चूँकि शव से लगातार दुर्गन्ध उठ रही थी, लोगों का वहाँ ठहरना मुश्किल हो रहा था और शव का अंतिम संस्कार काफी दूर उसके गाँव तनौद में करना था अतः परिजन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विवशता में सहमत हुए और शाम चार बजे शव को लेकर अपने गाँव की ओर रवाना हो गए।
       बहरहाल, अब देखना यह है कि वजरॉन कंपनी मृतक हेमसागर के क्रियाकर्म पश्चात् अपने वादे पर खरा उतरती भी है या फिर शेष राशि पाने मासूम बच्चों और विधवा पत्नी को दर-दर भटकना पड़ेगा। बात करें तहतक की तो जिन मजदूरों की बदौलत लाखों-करोड़ों बटोरते हैं वही ठेकेदारों और उद्योगपतियों की नजर में किसी मजदूर की जान, किसी गरीब सुहागन का सुहाग या किसी गरीब मासूम के सिर का साया की कीमत चंद रुपयों के सिवा कुछ भी नहीं। इसे एक विडंबना ही कहेंगे कि मजदूरों और किसानों के हित के लिए जहाँ सरकार और कानून बड़ी-बड़ी बात करते हैं वो केवल किताबों और नेताओं के लच्छेदार भाषणों में ही सुशोभित हैं। वास्तव में धरातल पर देखा जाय तो इस लोकतान्त्रिक देश में केवल मजदूर और किसान प्राचीन काल से शोषण का शिकार होते आये हैं और हो रहे हैं।

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