दो वर्ष पूर्व घोषित सड़क निर्माण में विलम्ब को लेकर सहकारिता एवं उद्योग समिति एक्शन मोड पर



तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। यह तो सर्वविदित है कि जिले में स्थापित उद्योगों के आसपास ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों की स्थिति कितनी जर्जर हो चुकी है। सड़कों के निर्माण को लेकर न तो औद्योगिक प्रबंधन ध्यान दे रहे हैं और ना ही शासन-प्रशासन को इसकी चिंता है। लाखा-गेरवानी-चिराईपानी-पाली-देलारी मार्ग के निर्माण के लिए दो वर्ष पूर्व बजट में घोषित हो चुका है, किन्तु आज तलक कोई कार्य नहीं हुआ है। यही वजह है कि सहकारिता एवं उद्योग समिति के सभापति गोपाल अग्रवाल ने पत्र लिखकर सड़क निर्माण में हो रहे विलम्ब और अद्यतन स्थिति की जानकारी लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता से माँगी है।


         बता दें कि राज्य शासन द्वारा बजट में (लाखा-गेरवानी-चिराईपानी-पाली-देलारी) मार्ग के निर्माण की घोषणा को लगभग दो वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। यह मार्ग क्षेत्र की औद्योगिक कनेक्टिविटी, भारी वाहनों की आवाजाही तथा स्थानीय ग्रामीण जनता के दैनिक आवागमन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, परन्तु घोषणा के दो वर्ष बीत जाने के बाद भी इस मार्ग के निर्माण में कोई प्रगति नहीं हुई, जिसके कारण आम जनता में निराशा एवं भारी असंतोष व्याप्त है।


            जिला पंचायत की सहकारिता एवं उद्योग समिति के सभापति गोपाल अग्रवाल के पत्र में उल्लेखित  छः बिंदुओं पर तथ्यात्मक एवं दस्तावेजी जानकारी की अपेक्षा की गयी है, जिसमें 1. घोषणा उपरांत की गयी कार्यवाही का विवरण 2. निर्माण के विलम्ब के स्पष्ट कारण 3. वित्तीय स्थिति एवं बजटीय आबंटन 4. निविदा एवं कार्यादेश की स्थिति 5.डिजाइन एवं गुणवत्ता मानक 6. व्यक्तिगत जवाबदेही प्रमुख हैं। इस प्रकार उपरोक्त समस्त जानकारी सात दिवस के अंदर समिति के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है।  पत्र में यह भी उल्लेख है कि निर्धारित समयावधि में जानकारी उपलब्ध नहीं करायी गयी तो समिति द्वारा इस विषय को शासन स्तर पर अवगत कराते हुए आवश्यक कार्यवाही हेतु अनुशंसा की जाएगी।
           बहरहाल, अब देखना उचित और आवश्यक होगा कि जर्जर मार्ग को लेकर जिला पंचायत की सहकारिता एवं उद्योग समिति के एक्शन मोड पर आने से कुम्भकर्णी नींद में मदहोश लोक निर्माण विभाग जागेगा या फिर उसे उठाने के लिए पकवानों की मीठी-मीठी सुगंध बिखेरनी पड़ेगी। बात तह तक की करें तो स्थानीय ग्रामीण अपने स्तर पर चक्काजाम, धरना प्रदर्शन और कंपनी प्रबंधनों से बैठक कर झूठे आश्वासनों से तंग आ चुके हैं। मार्ग के मरम्मत के नाम पर सुनील इस्पात, महालक्ष्मी, वजरान, श्री ओम रुपेश जैसे बड़ी कंपनियों द्वारा केवल लीपापोती कर जनता और प्रशासन को चकमा दिया जा रहा है। मार्ग में पानी का छिड़काव पूरे दिन भर में मात्र एक-दो बार ही आधा-अधूरा कर औपचारिकता निभाया जा रहा है, जबकि पीड़ित ग्रामीणों के इसी मार्ग के चलते यही कम्पनियाँ लाखों-करोड़ों रूपए मुनाफा कमा रही हैं और यहाँ के वातावरण में जहरीला प्रदूषण फैला कर स्थानीय ग्रामीणों के जीवन से खिलवाड़ कर रही हैं। पर्यावरण विभाग भी कभी-कभार छोटा-मोटा जुर्माना लगाकर खानापूर्ति कर लेता है। अब जनता बार-बार आंदोलन कर कब तक चीखती-चिल्लाती रहेगी? उसे भी तो अपनी रोजी-रोटी की समस्या है।
          

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