टेंडा नावापारा धान खरीदी केंद्र की मनमानी से बिफरे किसान, कर दी नाकेबंदी


💥 धान खरीदी केंद्र में मनमानी का आरोप, प्रति एकड़ 21 की जगह 17 क्विंटल ले रहे धान।

💥 सूखत के नाम पर मानक वजन से अधिक ले रहे किसानों से धान।

💥 गुस्साए किसानों ने किया सड़क जाम, मौके पर पहुँचे तहसीलदार।

💥प्रति एकड़ 21 क्विंटल लेने तथा ऑनलाइन/ऑफलाइन टोकन काटने दिए निर्देश।

तहतक न्यूज/घरघोड़ा-रायगढ़, छत्तीसगढ़। किसानों को धान बेचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो इसके लिए छत्तीसगढ़ शासन ने व्यापक तैयारियों के साथ सख्त निर्देश दे रखे हैं, लेकिन कुछ धान खरीदी केंद्रों में किसानों की परेशानियाँ दूर होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। ऐसे में भ्रष्टाचार और घोटालों से गहरा नाता रखने वाला नावापारा (टेंडा) धान उपार्जन केंद्र भला कहाँ पीछे रहने वाला है? बताया जा रहा है कि यहाँ पर 21 क्विंटल की जगह 17 क्विंटल धान लिया जा रहा है, जिससे किसानों में आक्रोश व्याप्त है।
             किसानों का आरोप है कि यहाँ धान खरीदी केंद्र में उनके द्वारा लाये गए धान को सही मापतौल में नहीं लिया जा रहा है। यही नहीं, शासन द्वारा निर्धारित प्रति एकड़ 21 क्विंटल की जगह 17/18 क्विंटल धान लिया जा रहा है, जिससे किसानों में काफी नाराजगी है। प्रबंधक के तानाशाही रवैये के खिलाफ किसानों ने हल्ला बोल दिया और छाल-घरघोड़ा मुख्यमार्ग में केंद्र के सामने आर्थिक नाकेबंदी कर दी। सूचना मिलने पर घरघोड़ा तहसीलदार मनोज कुमार गुप्ता मौके पर पहुँचे और पीड़ित किसानों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनी और पूर्व की भांति प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान लेने को कहा।  इसके साथ ही ऑनलाइन और ऑफलाइन टोकन काटने के भी निर्देश दिए। धान विक्रय करने में किसानों को आ रही अन्य समस्याओं को उच्चाधिकारियों तक पहुँचाने और उसका निराकरण करने के आश्वासन पर किसानों ने नाकाबंदी समाप्त की।
               यह बताना आवश्यक है कि नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कुछ गरीब किसानों ने बताया कि यहाँ प्रति बोरी 40 किलो 900 से 950 ग्राम तक धान तौला जा रहा है, जबकि मानक के अनुसार 40 किलो धान+  बोरी का वजन लेना है। बोरी का वजन नया 500 ग्राम और पुराना  550 ग्राम होता है। इस प्रकार वास्तविक तौल 40 किलो 550 ग्राम होता है। रही बात सूखत की तो अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम तक लेना चाहिए, लेकिन सूखत की आड़ में 900 से 950 ग्राम लेना यहाँ तक कि तो कई केंद्रों में 41.200 किलो तक तौला जा रहा है। यही नहीं, हमालों को भी किसानों द्वारा अलग से राशि देनी पड़ रही है। ऐसे में धान खरीदी में पारदर्शिता और किसानों के साथ सही व्यवहार सुनिश्चित किये जाने के दावे झूठे साबित होते नजर आ रहे हैं।
           ऐसी शिकायतें धान खरीदी केंद्रों पर अक्सर सामने आती हैं। यदि किसानों को लगता है कि उनके धान के तौल में गड़बड़ी या गुणवत्ता के नाम पर कटौती की जा रही है तो स्थानीय प्रशासन या कृषि विभाग से सम्पर्क किया जा सकता है। ऐसे मामलों में एसडीएम, तहसीलदार या कृषि विभाग के अधिकारी जाँच करते हैं।
             किसान अपनी शिकायत धान खरीदी केंद्र प्रभारी, तहसीलदार या कृषि उपज मंडी समिति को लिखित में दें। अपने टोकन, गिरदावरी (खेत की जानकारी) की कॉपी और धान की मात्रा का रिकॉर्ड रखें। अपनी समस्या को स्थानीय मीडिया या सोशल मीडिया (जैसे ट्विटर/फेसबुक) के माध्यम से उठाएं, जिससे प्रशासन तक बात पहुँचती है।
       फिलहाल, नावापारा धान खरीदी केंद्र का मामला सामने आने के बाद धान खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और किसानों के हित में बनाने के लिए निरंतर निगरानी और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।

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