
तहतक न्यूज/तमनार-रायगढ़, छत्तीसगढ़।
छत्तीसगढ़ के आदिवासी सीधे, सरल और भीरू स्वभाव के माने जाते हैं। वन प्रांतों के बीच रहने वाले इस जन समुदाय का जीवन निर्वहन जल, जंगल और जमीन पर आधारित है। उन्हें अपने जल, जंगल और जमीन से बेहद लगाव है। यही वजह है कि वो अपना जमीन छोड़ना पसंद नहीं करते। ऐसे में कोयला उत्खनन के लिए अपनी जमीनें देना उनके लिए किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं है। कुछ ऐसी ही स्थिति जिले के आदिवासी बाहुल्य तमनार क्षेत्र की है जहाँ के ग्रामीण आदिवासी जिंदल कोल ब्लॉक के जनसुनवाई को लेकर काफी चिंतित और आक्रोशित हैं। बीते कई दिनों से वे तमनार के सीएचपी चौक पर जनसुनवाई के विरोध में शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन करते हुए निरस्त करने की माँग कर रहे थे, लेकिन इस शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने के लिए जब पुलिस मौके पर पहुंची तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गयी। विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच जमकर हिंसक झड़प हो गयी।
पुलिस सूत्रों की मानें तो अचानक लगभग दोपहर ढाई बजे भीड़ बेकाबू हो गई और बैरियर को तोड़ते हुए पत्थर एवं डंडों से वहां उपस्थित पुलिस पर टूट पड़ी। उपद्रवी भीड़ ने जमकर लाठी डंडे बरसाए। इससे एसडीओपी अनिल विश्वकर्मा, थाना प्रभारी तमनार कमला पुसाम तथा एक आरक्षक को गंभीर चोट आई तथा कई पुलिस के जवान और महिला आरक्षक घायल हैं, जिन्हें तत्काल प्राथमिक उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अनियंत्रित भीड़ द्वारा मौके पर पुलिस की बस, जीप, एंबुलेंस को आग लगा दी गई तथा कई शासकीय वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके पश्चात अनियंत्रित भीड़ जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट सीएचपी की ओर बढ़कर अंदर घुसकर कन्वेयर बेल्ट तथा दो ट्रैक्टर व अन्य वाहन को आग लगा दी गई तथा ऑफिस में भी उत्पात मचाकर तोड़फोड़ की गई।
उग्र भीड़ को समझाईश देने के लिए विधायक, लैलूंगा विद्यावती सिदार, कलेक्टर रायगढ़ एवं पुलिस अधीक्षक दिव्यांग कुमार पटेल के मौके पर जाने पर भीड़ उग्र होते हुए पथराव किया गया तथा पुनः सीएचपी प्लांट की ओर जाकर प्लांट के अंदर आगजनी की घटना की गई। बहरहाल, इस मामले में कुछ लोगों की गिरफ्तारी होने से तमनार क्षेत्र के वातावरण में तनाव जहर घुलने पर एहतियात के तौर पर वहां पुलिस ने घोषित छावनी बना रखा है, ताकि कोई बड़ी अप्रिय वारदात न हो सके।
बता दें कि 8 दिसंबर को जिंदल कोल ब्लॉक को लेकर कराई गई कथित नियमविरुद्ध जनसुनवाई के विरोध में ग्रामीण लगातार आंदोलन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण ढंग से धरना दे रहे थे और जिंदल समूह के आर्थिक बहिष्कार का आह्वान कर रहे थे, लेकिन पुलिस द्वारा जबरन धरना स्थल खाली कराने के प्रयास ने पूरे आंदोलन को हिंसक रूप में बदल दिया।
यहाँ यह बताना आवश्यक है कि ग्रामीणों के शांतिपूर्ण चल रहे धरने के दौरान कुछ ही दिन पहले इन्हीं पुलिस वालों को यही आंदोलनकारी ग्रामीणों ने प्रेमपूर्वक अपने ही हिस्से का भोजन कराया था। प्रेम और भाईचारे की साथ बैठ खाने की तस्वीर खूब वायरल हुई थी। ऐसा लगा जैसे इस विवाद का पटाक्षेप सुखद होगा, किन्तु आज की इस तस्वीर ने तो पासा ही पलट दिया।
