💥भगवान का दूसरा रूप कहे जाने वाले डॉक्टर का सामने आया विकृत चेहरा।
💥 दस लाख में खरीदी किडनी और साठ लाख में बेची।
💥50 हजार कम मिलने से नाराज डोनर ने की पुलिस में शिकायत।
💥करोड़ों के खेल में शामिल नामी-गिरामी अस्पताल।
तहतक न्यूज/कानपुर, उत्तरप्रदेश। चिकित्सा के क्षेत्र को एक बेहद ही सम्मानजनक और सेवा भाव के रूप में देखा जाता रहा है। यही कारण है कि लोग चिकित्सक को भगवान का दूसरा रूप मानते आये हैं, लेकिन वर्तमान समय में धन के लालच में भगवान के इस दूसरे रूप ने समाज के सामने एक अत्यंत ही घिनौना चेहरा प्रस्तुत किया है, जिससे मानव समाज के माथे पर गहरी चिंता की लकीरें उभर आयीं हैं। आपको बता दें कि देश में ऐसे कई प्रतिष्ठित बड़े अस्पताल हैं जहाँ मरीजों से भारी भरकम राशि लेकर अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का खेल न जाने कब से चला आ रहा था। इस काले कारनामे का खुलासा उस समय हुआ जब महज 50 हजार रुपये के विवाद ने इस करोड़ों रुपये के अंतर्राष्ट्रीय अंग तस्करी नेटवर्क की परतें खोल दीं। इस मामले में नामी-गिरामी अस्पतालों, डॉक्टरों और दलालों की मिलीभगत उजागर हुई है। पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह ने अब तक 40 से 50 लोगों का अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किया है, जिसमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मेरठ में एमबीए की पढ़ाई कर रहे बिहार के समस्तीपुर निवासी छात्र आयुष ने पुलिस से शिकायत की थी। आर्थिक तंगी से परेशान आयुष ने 10 लाख रुपये में अपनी किडनी बेचने का सौदा किया था, लेकिन ऑपरेशन के बाद दलालों ने 50 हजार रुपये काट लिए। साढ़े नौ लाख रुपये पाकर नाराज आयुष ने पुलिस में शिकायत कर दी।
पुलिस जांच में सामने आया कि इस गिरोह का मुख्य सरगना शिवम अग्रवाल उर्फ शिवम काड़ा पेशे से एम्बुलेंस चालक था। वह आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए तलाशता और किडनी बेचने का लालच देता था। आयुष भी इसकी जाल में फंस गया था।
जांच में पता चला कि मुजफ्फरनगर की मरीज पारुल तोमर को किडनी की जरूरत थी। दलालों और डॉक्टरों ने उसके परिजनों से 60 लाख रुपये वसूले और किडनी देने वाले आयुष को सिर्फ 10 लाख देने का सौदा तय हुआ। इस प्रकार एक ऑपरेशन में ही 50 लाख रुपये का सीधा मुनाफा गिरोह को मिला।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने सोमवार देर रात कल्याणपुर इलाके के अहूजा हॉस्पिटल, प्रिया हॉस्पिटल और मेड लाइफ हॉस्पिटल पर छापेमारी की। जांच में सामने आया कि मेड लाइफ हॉस्पिटल बिना वैध रजिस्ट्रेशन के चल रहा था। मौके से आयुष और मरीज पारुल को बरामद किया गया। आयुष की स्थिति गंभीर होने पर उसे तुरंत सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पुलिस ने जहाँ आहूजा हॉस्पिटल के संचालक डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, उनकी पत्नी डॉ. प्रीति आहूजा, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राम प्रकाश, डॉ. नरेंद्र सिंह और मास्टरमाइंड शिवम अग्रवाल को गिरफ्तार किया है, वहीं इस रैकेट से जुड़े डॉ. अफजाल, सर्जन डॉ. रोहित और वैभव अनुराग अभी फरार हैं।
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया कि इस रैकेट के तार सिर्फ कानपुर तक सीमित नहीं हैं, अपितु शुरुआती जांच में इनके मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और नेपाल तक कनेक्शन मिले हैं। पुलिस अनुमान के मुताबिक यह गिरोह अब तक 40/50 अवैध ट्रांसप्लांट कर चुका है, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी ने सख्त कार्रवाई करते हुए आहूजा और प्रिया हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, वहीं बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे मेड लाइफ हॉस्पिटल को सील कर दिया गया है। यही नहीं, मौके से 1.75 लाख रुपये नकद और बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित दवाएं भी जब्त की गई हैं।
विदित हो कि किडनी देने वाले आयुष और किडनी लेने वाली पारुल का इलाज कानपुर मेडिकल कॉलेज के हैलेट अस्पताल में चल रहा है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि दोनों को इंफेक्शन का खतरा है और अस्पताल में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण दोनों को लखनऊ के पीजीआई रेफर किया जा रहा है।
कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के बड़े मामले, जिसमें डॉक्टरों, अस्पताल संचालकों और दलालों के एक संगठित सिंडिकेट के हुए भंडाफोड़ ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। इलाज के नाम पर पूरे देश में चल रहे लूट-खसोट के इस गोरखधंधे की हकीकत की तहकीकात में तहतक जाकर देखा जाय तो सच की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं वह बेहद ही चिन्ताजनक हैं। मरीज के उपचार में होने वाले वास्तविक खर्च से न केवल कई गुना अधिक की राशि वसूली जा रही है, अपितु डॉक्टर, मेडिकल स्टोर्स और लैब के बीच कमीशन का खेल खुलेआम चल रहा है। इस पर न तो शासन-प्रशासन का कोई अंकुश नजर आ रहा है और ना ही जन-प्रतिनिधियों, विधायकों और मंत्रियों को जनता की परवाह है।
लेनदेन के विवाद ने किया करोड़ों के अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़
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