
तहतक न्यूज/रतलाम।
इसमें कोई शक नहीं कि चिकित्सक को भगवान का दूसरा रूप माना जाता है। मरीज किसी बीमारी अथवा दुर्घटनावश मरणासन्न अवस्था में होता है तो एक डॉक्टर ही होता है जो उपचार कर मरीज को नया जीवन देता है। मरीज और उसके परिजन उस मसीहा को दिल से दुआ देते हैं। इस दुआ से जो सकून और ऊर्जा मिलती है वो बड़ी अनमोल होती है लेकिन भगवान का दर्जा प्राप्त वही चिकित्सक चंद रुपयों की लालच में आकर मरीज के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करे और उसके एवज में वसूली करे तब उसे क्या कहेंगे?
ऐसे ही एक निजी अस्पताल की घिनौनी करतूत का मामला मध्यप्रदेश के रतलाम जिले से सामने आया है जहाँ गीता देवी अस्पताल के स्टॉफ द्वारा मरीज के परिजनों से रूपये ऐंठने के लिए मरीज को पाँच दिनों से आईसीयू में रस्सी से बांध कर मरीज को कोमा में है बता कर महँगी दवाइयाँ मंगवायी जा रही थी। मामले का खुलासा तब हुआ जब मरीज आईसीयू से बाहर आ गया और सारी सच्चाई बतायी।

मरीज के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन मरीज को बेहोश बता कर उनसे महँगी दवाइयाँ मंगा रहा था जबकि मरीज बंटी पूरी तरह से होश में है। बंटी को ये साबित करने के लिए खुद कैथेटर और ऑक्सीजन पाईप लगे हालत में सड़क पर आना पड़ा। मरीज को ऐसी हालत में देख आने-जाने वालों की भीड़ लग गयी। मरीज और परिजनों ने चीख-चीख कर गीता देवी अस्पताल के हकीकत की सारी बात बतायी।
बता दें कि बंटी को बीते दिनों गीता देवी हॉस्पीटल में भर्ती कराया था। बताया जा रहा है कि मारपीट के मामले में वह बेहोश हो गया था। हंगामा बढ़ते देख स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुँची और मरीज तथा उसके परिजनों को समझाईस देकर शांत कराया।
घटनाक्रम के तह तक जाकर देखा जाय तो जो हकीकत सामने आ रही है उससे यही प्रतीत होता है कि वर्तमान समय में चिकित्सा सेवा, धनोपार्जन का एक बड़ा माध्यम बन चुका है। विश्वासघात और कमीशन के खेल में लोगों के जान से खिलवाड़ किया जा रहा है तो वहीं दवाओं के लागत मूल्यों से कई गुना ज्यादा कीमत वसूल कर भारी मुनाफा कमाया जा रहा है। आम जनता अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा महँगे इलाज और दवाओं में खर्च कर रहा है। पैसा कमाने के लिए पहले शरीर को दांव पर लगाना पड़ रहा है फिर उसी शरीर को बचाने के लिए वही पैसों को अस्पताल में खर्च करना पड़ रहा है।