तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। कभी-कभी मामूली सी कहासुनी में विवाद इतना बढ़ जाता है कि लोग अपने गुस्से पर काबू नहीं कर पाते और एक-दूसरे को मरने-मारने पर उतारू हो जाते हैं। ऐसी ही एक घटना में थाना कापू क्षेत्र के ग्राम पखनाकोट में एक ग्रामीण की हत्या हो गयी। पुलिस ने 24 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए निर्मम हत्या के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपी ने आपसी कहासुनी एवं अपने इलाज कराने की बात को लेकर हुए विवाद के दौरान चैतराम यादव उर्फ महेश यादव पर टांगी से वार कर उसकी हत्या कर दी।

जानकारी के अनुसार, दिनाँक 14 सितंबर 2026 को थाना कापू पुलिस को ग्राम पखनाकोट निवासी चैतराम यादव उर्फ महेश यादव (50 वर्ष) की टांगी से वार कर हत्या किए जाने की सूचना मिली। सूचना पर एसडीओपी धरमजयगढ़ सिद्दांत तिवारी के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी कापू निरीक्षक धर्माराम तिर्की पुलिस टीम के साथ तत्काल ग्राम पखनाकोट पहुँचे। मौके पर मृतक के भतीजे वासुदेव यादव (47 वर्ष) ने पुलिस को बताया कि दिनाँक 13-14 सितंबर की दरम्यानी रात गांव के ही नैहर साय मांझी (45 वर्ष) उनके घर आया था। किसी बात को लेकर हुए विवाद के दौरान चैतराम यादव उर्फ महेश यादव पर टांगी से हमला कर दिया। मृतक का शव आरोपी के घर की परछी में जमीन पर पड़ा मिला। कापू पुलिस ने तत्काल मर्ग कायम कर हत्या का अपराध पंजीबद्ध किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस टीम द्वारा आरोपी की लगातार पता तलाश की गई, जिसके बाद उसे गांव से हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। आरोपी ने बताया कि घटना के बाद उसने वारदात में प्रयुक्त टांगी को छाताघुरा जंगल में पत्थर के नीचे छिपा दिया था। आरोपी के मेमोरेंडम के आधार पर पुलिस ने छाताघुरा जंगल पहुँचकर हत्या में प्रयुक्त टांगी बरामद कर जप्त की है। आरोपी नैहर साय मांझी (45 वर्ष) पिता स्व. गोपाल मांझी को थाना कापू में दर्ज हत्या के अपराध में गिरफ्तार कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
एसएसपी शशि मोहन सिंह के दिशा-निर्देशन में कापू पुलिस ने मामले की त्वरित जाँच करते हुए 24 घंटे के भीतर आरोपी तक पहुँचकर हत्या की गुत्थी सुलझाई।
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी कापू निरीक्षक धर्माराम तिर्की, प्रधान आरक्षक लक्ष्मी कैवर्त, सोमेश गोस्वामी, आरक्षक संजीव पटेल, कन्हैया लाल भगत एवं विभूति सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
ग्रामीण क्षेत्रों से निकल कर आ रही इस तरह की झकझोर देने वाली घटनाओं में बात तह तक की करें तो आज मानव समाज में सहनशीलता नाम की कोई चीज नहीं रह गयी है। छोटी-छोटी बातों में लोग आक्रोश में आकर आक्रामक हो रहे हैं और बिना सोचे-समझे हत्या जैसी वारदात को भी अंजाम देने से डर नहीं रहे हैं। वहीं, सब को मालूम है कि कानून के हाथ उसके गिरेबान तक एक न एक दिन पहुँच ही जायेंगे। इस प्रकार की पाशविक प्रवृत्ति सभ्य समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।



