जिंदल की जनसुनवाई का जिन्न फिर निकला बोतल से बाहर

💥जिंदल की गारे-पेलमा कोल माइंस की स्थगित जनसुनवाई का 08 दिसंबर को पुनः आयोजन।

💥 दर्जन भर गाँव होंगे प्रभावित, तमनार के सर्द मौसम में विरोध की सरगर्मी हुई तेज।

💥 मुआवजे की बड़ी माँग पर जिंदल के छूट रहे काले पसीने..!

💥 न उगलते बन रहा न निगलते, जिंदल के लिए बना प्रतिष्ठा का सवाल..?

💥 क्या जनआक्रोश की धधकती ज्वाला में फूटेगा विरोध का बम..?

तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़।
             जिले में जनसुनवाईयों के विरोध की चिंगारी अभी ठीक से बुझ नहीं पायी है और अब उसे फिर से हवा मिलनी शुरू हो गयी है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल ने कोयला खदान गारे-पेलमा सेक्टर-1 की स्थापना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु आगामी दिनाँक 08/12/2025 को जनसुनवाई तमनार के धौराभाठा में निश्चित किये जाने की सूचना जारी की है, जिससे लोगों के माथे पर बल पड़ने लगे हैं और भवें टेढ़ी होने लगी हैं।

          प्राप्त जानकारी के अनुसार जिंदल पॉवर लिमिटेड की गारे-पेलमा सेक्टर-1 खुली व भूमिगत कोयला खदान है, जिसका क्षेत्र 3020 हेक्टेयर तथा उत्पादन क्षमता 15 MTPA है। इसमें बुढ़िया, समकेरा, आमगांव, खुरुशलेंगा, धौराभाठा, बिजना, लिबरा, महलोई, झींका बहाल, झरना, टांगरघाट जैसे दर्जन भर गाँव प्रभावित होंगे। इसकी लोकसुनवाई 08 दिसंबर 2025 को दिन सोमवार, साप्ताहिक बाजार का मैदान (शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के पास) धौराभाठा, तह. तमनार, जिला रायगढ़ में नीयत की गयी है।

              उल्लेखनीय है कि जिंदल पॉवर लिमिटेड की गारे-पेलमा सेक्टर-1 की जनसुनवाई 14 अक्टूबर को प्रस्तावित था, लेकिन कोयला खदान खुलने से होने वाले दुष्प्रभावों को लेकर स्थानीय ग्रामवासियों ने हजारों की संख्या में कलेक्ट्रेट पहुँच कर जमकर विरोध किया था और इसे निरस्त करने की माँग की थी। ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश और भारी विरोध को देखते हुए 14 अक्टूबर की जनसुनवाई को स्थगित कर दिया गया।

बता दें कि कलेक्टर रायगढ़ के निर्देश पर 28 अक्टूबर को कोल माइंस सेक्टर-1 से प्रभावित ग्रामों की कोर कमेटी और जिंदल प्रबंधन समिति के अधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई थी, जिसमें कमेटी के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कह दिया था कि जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे, किन्तु गहन चर्चा और विचार-विमर्श के बाद कुछ शर्तों के आधार पर राजी हो गए और कुछ प्रमुख शर्तों के रूप में जैसे परियोजना क्षेत्र की सभी जमीनों की एकमुश्त खरीदी, प्रति एकड़ एक करोड़ बीस लाख रु. मुआवजा राशि, प्रति दो एकड़ या प्रति राशनकार्ड एक सदस्य को कंपनी में नौकरी, नौकरी न देने की स्थिति में दस लाख रु. अतिरिक्त राशि देने तथा सम्पूर्ण पुनर्वास जिसमें सड़क, बिजली, पानी, स्कूल, अस्पताल आदि सुनिश्चित करने जैसी मांगें रखी गयी थीं।

बहरहाल, अब देखना दिलचस्प होगा कि मुआवजा में इतनी भारी-भरकम राशि और अन्य सुविधाएं दे पाने के लिए क्या जिंदल पॉवर लिमिटेड हिम्मत जुटा पायेगा ? यहाँ यह भी बताना लाजिमी होगा कि हाल ही के दिनों में जल-जंगल और जमीन के सिपाहियों के विरोध के आगे जहाँ कई जनसुनवाइयों को स्थगन का मुँह देखना पड़ा है, वहीं आम जनता के आत्मविश्वास और मनोबल का ग्राफ भी काफी बढ़ा है। ऐसे में गारे-पेलमा कोल माइंस देश की जानी-पहचानी अग्रणी कम्पनी "जिंदल समूह" के लिए यह एक प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *