
तहतक न्यूज/धरमजयगढ़-रायगढ़, छत्तीसगढ़।
जिले में आजकल एक नया ही ट्रेंड चल रहा है, बड़ी संख्या में झुण्ड बनाओ और मुख्यालय में हल्ला बोल दो। माँग पूरी हो न हो, मकसद में कामयाबी जरूर मिल जाएगी। ऐसी ही कुछ दिलचस्प तस्वीरें समाचार पत्रों और न्यूज चैनलों में अक्सर देखने को मिल रही हैं।
ज्ञात हो कि बीते बुधवार को अडानी पुरुंगा भूमिगत कोयला खदान के खिलाफ सैकड़ों ग्रामीणों जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं, कलेक्ट्रेट में हल्ला बोलते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया था तथा अडानी की जनसुनवाई निरस्त करने की मांग ग्रामीणों ने की थी और ग्रामवासियों ने यह भी बताया था कि ग्राम सभा में भी जनसुनवाई निरस्त करने का प्रस्ताव पारित किया गया है। यह थी कल तक की तस्वीर और आज की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है।

बता दें कि जिला प्रशासन की ओर से धर्मजयगढ़ एसडीएम की अध्यक्षता में कंपनी और ग्रामीणों के बीच मध्यस्थता करते हुए बैठक आयोजित कर समझौता किया गया। जिले में ऐसा प्रथम बार देखने को मिला कि विरोध में उतरे ग्रामीणों के बीच प्रशासनिक अधिकारियों ने कंपनी की ओर से मध्यस्थता कर समझौता कराया हो l प्रशासनिक अधिकारियों के इस पहल पर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रशासन की पहल और सकारात्मक बातचीत से धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम पुरुंगा, तेन्दुमुड़ी, साम्हरसिंघा एवं कोकदार के ग्रामीणों ने मेसर्स अंबुजा सीमेंट लिमिटेड, अडानी पुरुंगा भूमिगत कोयला खदान परियोजना से संबंधित आगामी 11 नवंबर को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई में शामिल होने की सहमति दे दी है।

जनसुनवाई निरस्त करने की मांग संबंधी ज्ञापन के संदर्भ में कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम धरमजयगढ़ प्रवीण भगत की अध्यक्षता में आज जनपद पंचायत धरमजयगढ़ के सभाकक्ष में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रभावित सभी ग्रामों के सरपंच, उपसरपंच, जनप्रतिनिधि एवं मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक के दौरान ग्रामीणों द्वारा उठाए गए विभिन्न बिंदुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। अडानी कंपनी के अधिकारियों ने भी अपना पक्ष रखा।
एसडीएम प्रवीण भगत ने ग्रामीणों को जानकारी देते हुए बताया कि प्रस्तावित भूमिगत कोयला खनन परियोजना से न तो कृषि भूमि प्रभावित होगी और न ही जल-जंगल-जमीन को कोई नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि खनन से जलस्तर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और वन्य जीव-जंतुओं व वनोपज संसाधनों की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित की जाएगी। इस परियोजना में खदान पूरी तरह भूमिगत होगी तथा इससे ग्रामीणों का कोई भी विस्थापन नहीं होगा, जबकि कंपनी के आगमन से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि ग्राम सभा के अधिकार, परंपराएं और पेशा एक्ट के सभी प्रावधान अपने मूल स्वरूप में सुरक्षित रहेंगे। वन्यजीव संरक्षण एवं पर्यावरणीय मानकों का पालन कंपनी द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा। कोयले का परिवहन रेल मार्ग से किया जाएगा, जिससे सड़कों पर यातायात दबाव और प्रदूषण में कमी आएगी। बैठक के अंत में ग्रामसभा के माध्यम से कंपनी, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच सकारात्मक संवाद स्थापित हुआ। ग्रामीणों ने प्रशासन के आश्वासनों और परियोजना संबंधी स्पष्ट जानकारी के बाद जनसुनवाई में भाग लेकर अपनी बात रखने पर सहमति जताई।


धरती के गर्भ में छुपे खजाने ही तो हैं जो उस देश की आर्थिक मजबूती के आधार होते हैं और ऐसा कौन है जो इसे प्राप्त करना नहीं चाहेगा? विकास के लिए खदानें व कल-कारखाने भी जरुरी हैं, लेकिन वन्य जीव संरक्षण एवं पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों का पालन भी उतना ही जरुरी है। वर्तमान समय में बढ़ रहे ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण प्रदूषण गंभीर चिंता का विषय है। तमाम परिस्थितियों की तह तक जा कर देखें तो किसी भी कंपनी की स्थापना या खदानों का विरोध नहीं होता यदि वे पर्यावरणीय सुरक्षा एवं अन्य सुरक्षा सम्बन्धी नीति-नियमों का उल्लंघन नहीं करते।


बहरहाल, बैठक के बाद 11 नवम्बर को अडानी की प्रस्तावित जनसुनवाई में भाग लेकर अपनी बात रखने के लिए सभी ग्रामीण जन सहमत हो गए हैं। वहीं यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि बहुचर्चित ग्राम मुड़ागांव की तरह यहाँ भी लक्ष्मी की बारिश से विरोध की सुलगती चिंगारी बुझ जाएगी और दूर-दूर तक सुनाई देने वाले अडानी के अट्टहास में स्थानीय वासियों का करुण क्रन्दन चौक-चौराहों तक ही सिमट कर रह जायेगा।








