अंधविश्वास का अंधेरा आज भी कायम है, अपशकुन मान नवजात शिशु को माँ ने फेंका कुएँ में

तहतक न्यूज/कबीरधाम,छत्तीसगढ़।
आज हम भले ही इक्कीसवीं सदी के आधुनिक सभ्य समाज में जीने का दावा करते हैं, लेकिन इसी मानव समाज का एक हिस्सा आज भी दकियानुसी विचारों और अंधविश्वास के ढकोसलों से बाहर नहीं निकल पाया है। ऐसे ही अंधविश्वास के फेर में एक दर्दनाक और हैरान कर देने वाली घटना की तस्वीर सामने आई है, जिसमें एक माँ ने अपने ही 15 दिन के नवजात शिशु की हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है।

यह घटना कबीरधाम के बोड़ला थाना क्षेत्र के नवाटोला (रानीदहरा) की है, जहाँ समरौतिन बाई बैगा (23 वर्ष) ने अंधविश्वास और पारिवारिक दबाव में आकर अपने 15 दिन के नवजात बेटे को कुएँ में फेंक दिया। 22 नवम्बर की सुबह कुएँ में नवजात बच्चे का शव देख गाँव में सनसनी फैल गयी, ग्रामीण दहशत में आ गए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और समरौतिन बाई को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की तो अपराध स्वीकार करते हुए उसने जो सच्चाई बतायी उसे सुन कर पुलिस के भी होश उड़ गए। उसने बताया कि उसका बच्चा 15 दिन पहले पैदा हुआ था, जन्म के समय बच्चे के मुँह में दो दाँत निकले हुए थे। परिवार वालों ने अपशगुन मान लिया और दहशत में तरह-तरह की बातें करने लगे। मायके आने के बाद परिवार के बहकावे में आकर वह नवजात बच्चे को कुएं में फेंक आई।



दिल को झकझोर कर रख देने वाली ऐसी घटनाओं के हकीकत की तहकीकात में तहतक जाकर मंथन करें तो जो तथ्य सामने हैं वो बेहद ही चिन्ताजनक हैं। ग्रामीण क्षेत्र अभी भी शिक्षा व जागरूकता से कोसों दूर है। यही कारण है कि अंधविश्वास और सामाजिक दबाव में आकर अशिक्षित परिवार भयानक कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं। वास्तव में शिक्षा का प्रचार-प्रसार केवल भाषणों और कागजों तक सीमित है। दूर देहातों में आज भी शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में लोग प्राचीन मान्यताओं और रीति-रिवाजों में उलझे हुए हैं। जरुरत है शिक्षा को ईमानदारी के साथ व्यापक रूप से धरातल पर लाने की ताकि लोग झूठे आडम्बरों और अंधविश्वास की काली छाया से बाहर निकल सकें।

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