राष्ट्र के परम वैभव के लिए दैनिक जीवन में पंच परिवर्तन अपनाएं - अरुणधर दीवान

तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़।
संघ स्थापना के उद्देश्य व देश को संघ की आवश्यकता के साथ संघ की 100 वर्ष की यात्रा पूर्ण होने पर प्रकाश डालते हुए जिला भाजपाध्यक्ष अरुण दीवान ने कार्यकताओं से आह्वान करते हुए कहा कि वे पंच परिवर्तन को अपनायें। अरूण धर दीवान ने कहा हम सभी के लिए राष्ट्र सदैव प्रथम था और आगे भी रहेगा।राष्ट्र के परम वैभव के लिए पंच परिवर्तन के अंतर्गत हम सभी कार्यकताओं को अपने दैनिक जीवन में सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली एवं स्वदेशी को नितान्त रूप से अपनाना चाहिए। डॉ. हेडगेवार ने संघ स्थापना का लक्ष्य हिंदू समाज को संगठित कर भारत को समर्थ और वैभवशाली राष्ट्र बनाना रखा। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए गुणवान, अनुशासित, देशभक्ति भावना से ओत-प्रोत, चरित्रवान एवं समर्पित कार्यकर्ताओं की जरूरत थी
ऐसे कार्यकर्ताओं का निर्माण करने के लिए हेडगेवार जी ने दैनंदिन ‘शाखा’ की कार्यपद्धति संघ में विकसित की। संघ ने इस कार्यपद्धति से शाखा की पाठशाला में लाखों योग्य कार्यकर्ता तैयार किए, जो इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए 100 वर्षों से समाज सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं। सौ वर्ष की इस यात्रा में संघ का उपहास हुआ कई बार आलोचना का शिकार होना पड़ा। तमाम विरोध के बाद भी संघ सामाजिक स्वीकार्यता की स्थिति में पहुंच गया है। संघ अपनी अनुपम कार्यशैली, निस्वार्थ सेवा के साथ स्वयंसेवकों के निस्वार्थ देशभक्ति के आचरण की वजह से भारतीय जनमानस के मानस पटल पर अमिट छाप छोड़ने के साथ-साथ समाज का विश्वास जीतने में सफल रहा। भारत के 98 प्रतिशत जिलों और 92 प्रतिशत खंडों में संघ की शाखाएं चल रही हैं। देशभर में 51,740 स्थानों पर 83,129 दैनिक शाखाएं तथा अन्य 26,460 स्थानों पर 32,147 साप्ताहिक मिलन चल रहे हैं, जो लगातार बढ़ रहे हैं। इनमें 59 प्रतिशत शाखाएं युवाओं (छात्रों) की शामिल हैं।गायों का संरक्षण, संवर्धन एवं नस्ल सुधार करते हुए जैविक खेती के लिए किसानों को प्रशिक्षण, प्रबोधन एवं प्रोत्साहन देने की दृष्टि से ‘गौ संरक्षण एवं संवर्धन’ का कार्य भी संघ के उद्देश्यों में शामिल है। 100 वर्षों से संघ का महायज्ञ अनवरत चल रहा है। जिला भाजपा अध्यक्ष दीवान ने कहा देश के सामने आने वाली सभी समस्याओं और चुनौतियों का समाधान कर, समाज में स्थायी परिवर्तन लाने हेतु समाज की व्यवस्थाओं का युगानुकूल निर्माण करना, संघ का लक्ष्य है।

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