पंडालों में छाया आधुनिकता का ग्रहण, प्रतिमाओं के बदलते स्वरुप पर सनातनियों का कड़ा विरोध

तहतक न्यूज/रायपुर, छत्तीसगढ़।
वर्तमान युग में आधुनिक तकनीक और आधुनिक फैशन लोगों के दिलो-दिमाग पर इतना हावी हो गया है कि वे अपनी परंपरा और संस्कृति का भी मजाक उड़ाने से नहीं चूक रहे हैं। ऐसी ही कुछ नकारात्मक तस्वीरें राजधानी से निकल कर सामने आ रहीं हैं, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। यही वजह है कि राजधानी रायपुर में गणेश प्रतिमाओं के नये डिजाइन को लेकर विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है।

हिंदू संगठनों का कहना है कि “AI गणेश”, “क्यूट गणेश” और “ट्रेंडिंग गणेश” जैसे नामों का इस्तेमाल और इन प्रतिमाओं का स्वरूप सनातन धर्म का अपमान है। आज संगठन के सदस्यों ने एसपी ऑफिस पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और ऐसी मूर्तियों को विसर्जित करने की मांग की।

बता दें कि रायपुर के लाखे नगर इलाके में इस वर्ष पहली बार एक ऐसी गणेश प्रतिमा स्थापित की गई है जिसे AI तकनीक के जरिए डिजाइन किया गया है। इसमें आंखों की पलकें खुलती और बंद होती नजर आ रही हैं। हिंदू संगठनों का कहना है कि गणेश प्रतिमाओं का “मनोरंजन” के रूप में प्रचार-प्रसार धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। उनका कहना है कि पारंपरिक स्वरूप से खिलवाड़ करना गलत है और प्रशासन को ऐसे आयोजनों पर रोक लगानी चाहिए।



शहर के कुछ पंडालों में गणेश जी की ऐसी प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जिन्हें कार्टून, बेबी डॉल, और ऑफ-शोल्डर जैसे आधुनिक और गैर-परंपरागत रूपों में बनाया गया है। इन प्रतिमाओं को लेकर हिंदू संगठनों और संत समाज ने कड़ा विरोध जताया है और इसे सनातन धर्म के अपमान से जोड़कर देखा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान समस्त हिंदू संगठन और संत समाज ने रायपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्यालय पहुंचकर अपनी आपत्ति दर्ज की है। संगठनों ने इन प्रतिमाओं को तत्काल हटाने और उनका विसर्जन करने की मांग की है। साथ ही, इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की गई है


आजकल हर्ष और उल्लास से जुड़ा कोई भी उत्सव, कार्यक्रम या समारोह हो विवाद का ग्रहण लग ही जाता है और इससे खुशियाँ कम हो जाती हैं। बात तह तक की करें तो आधुनिक विचारधाराएं हर चीज में नयापन देखना चाहती हैं, यहाँ तक कि सदियों से चली आ रही रीति-रिवाजों, परंपराओं और संस्कृतियों में भी बदलाव कर उसे केवल मनोरंजन के रूप में देख रही है। यह अनुचित नहीं तो उचित भी नहीं है। गणेश, जिनकी पूजा पहले होती है बाद में अन्य देवी-देवताओं की होती है आज उनके वास्तविक स्वरुप को बदल कर एक नया आकार देते हुए काल्पनिक और हास्यास्पद प्रतिमायें बनाकर लोगों के बीच प्रस्तुत कर महत्व को कम आंकने की कोशिश हो रही है। श्रद्धा व भक्ति का अपना अलग महत्व है। देवी-देवताओं को मनोरंजन की दृष्टि से देखना या उपहास उड़ाना सर्वथा गलत है। कहते हैं जब ऊपर वाले की लाठी चलती है तो दिखायी नहीं देती। जब इंसान के ऊपर दुख और तकलीफ की मार पड़ती है तो वही इंसान मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारे की दहलीज में नजर आता है।

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