बी.एस.स्पंज में ऑपरेटरों की मौत का सिलसिला जारी, एक माह के भीतर दूसरी मौत।

💥जून में हाइड्रा क्रेन ऑपरेटर की संदिग्ध मौत तो जुलाई में ईओटी क्रेन ऑपरेटर की दर्दनाक मौत।

💥गर्म स्लेग में गिरने से बुरी तरह झुलसे युवक की दर्दनाक मौत।

तहतक न्यूज/तराईमाल-रायगढ़, छत्तीसगढ़।
जिले के पूँजीपथरा थाना क्षेत्र में दर्जनों उद्योग स्थापित हैं जहाँ ऐसे भी कुछ उद्योग हैं जो श्रमिकों के सुरक्षा के प्रति बेहद लापरवाह हैं। उद्योगों द्वारा श्रमिक सुरक्षा में जानबूझ कर कमी या लापरवाही बरते जाने से जहाँ श्रमिकों की दर्दनाक मौतें हो रही हैं वहीं, उद्योग प्रबंधन अपने बचाव में कहीं कोई कसर नहीं छोड़ता और मामले को दबाने का पुरजोर प्रयास किया जाता है। ऐसा ही एक वाकया यहाँ फिर से प्रकाश में आया है जोकि मानव समाज के लिए एक गंभीर चिन्ता का विषय बन गया है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हाल ही के दिनों में तराईमाल स्थित बी.एस. स्पंज आयरन कंपनी में एक क्रेन ऑपरेटर की गर्म स्लेग के चपेट में आकर बुरी तरह से झुलस जाने से दर्दनाक मौत हो गयी। बताया जा रहा है कि मृतक दीपक कुमार (26 वर्ष) मधुपुरा बिहार का रहने वाला था, जोकि बी.एस. कंपनी के फर्नेस में EOT (इलेक्ट्रिक ओवरहेड ट्रैवलिंग) क्रेन ऑपरेटिंग करता था। घटना के दिन वह फर्नेस नंबर 7 में क्रेन चला रहा था तभी जोरदार धमाका हुआ। धमाके की आवाज सुनते ही दहशत में दीपक का शारीरिक संतुलन बिगड़ गया और गर्म स्लेग में जा गिरा। चूँकि दीपक बुरी तरह झुलस कर अधमरा हो गया था, कंपनी ने आनन-फानन में एम्बुलेंस से रायगढ़ स्थित अपेक्स हॉस्पिटल भिजवाया जहाँ चिकित्सकों के अथक प्रयास के बावजूद भी उसे नहीं बचाया जा सका।

उल्लेखनीय है कि बीते माह जून में भी इसी बी.एस. स्पंज आयरन में क्रेन (हाइड्रा) ऑपरेटर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने का मामला सामने आया था। बता दें कि मृतक राजकुमार बरेठ (42 वर्ष) मूलतः सक्ती जिले के ग्राम कड़ारी का रहने वाला था जोकि बी.एस. स्पंज आयरन में क्रेन (हाइड्रा) ऑपरेटर के पद पर काम करते हुए कंपनी के ही अंदर लेबर क्वार्टर में रहता था। घटना के दिन खाना खाने के लिए कंपनी के अपने रूम गया था, जहाँ वह गश खाकर गिर पड़ा और उसके मुँह से झाग निकलने लगा। बेसुध राजकुमार को जिला अस्पताल रायगढ़ ले जाया गया जहाँ पहुँचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। शव को पोस्टमार्टम रूम में रखने के बाद शोक-संतप्त परिजनों ने कंपनी के एच.आर. से लेकर एच.ओ.डी. तक घटना की जानकारी देते हुए सहायता माँगी, लेकिन धन्य है कंपनी प्रबंधन! जिसने उन्हें कोई सहयोग नहीं दिया। मृतक के भाई राजेश बरेठ ने बताया था कि राजकुमार चार दिन पहले ही अपने परिवार से मिलकर काम पर लौटा था। यही नहीं, कंपनी के अंदर क्वार्टर में राजकुमार की जब मौत हुई, उसके आधे घंटे पहले वह अपनी माँ से मोबाईल पर बातचीत किया था।

बहरहाल, बी.एस. कंपनी में एक के बाद एक लगातार हो रहे हादसों ने न केवल कंपनी प्रबंधन को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है, अपितु श्रमिकों के हित व सुरक्षा के जिम्मेदार अधिकारियों की सुस्त कार्यप्रणाली पर भी उंगलियाँ उठ रही हैं। यदि सभी उद्योगों में आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की लगातार मॉनिटरिंग होती तो दो वक्त की रोटी कमाने वाले बेकसूर कामगारों को असमय काल के गाल में समाना नहीं पड़ता और ना ही उनके परिवार अनाथ होते।

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