महाजेंको प्रोजेक्ट की स्वीकृति में भूपेश सरकार की अहम् भूमिका, मिले प्रमाणित दस्तावेज

तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़।
अडानी द्वारा बहुचर्चित मुड़ागांव जंगल कटाई मामले में अपने रायगढ़ प्रवास के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कटघरे में खड़ा करते-करते खुद जनता के सवालों के कटघरे में आ गये हैं और सांसद राधेश्याम राठिया द्वारा पूछे गये सवाल अब आम जनता के दिलोदिमाग पर प्रमाणिकता के साथ उठ रहे हैं।
दरअसल, मीडिया के हाथ जो सबूत लगे हैं, उससे साफ और स्पष्ट प्रतीत होता है कि कुछ मामलों में कांग्रेस जनता से सफेद झूठ बोल रही है, क्योंकि दस्तावेजों के अनुसार महाजेंको प्रोजेक्ट को स्वीकृति दिलाने में भूपेश सरकार की बराबर की भागीदारी रही है।

उल्लेखनीय है कि पिछले एक हफ्ते से मुड़ागांव में अडानी द्वारा पेड़ कटाई को लेकर कांग्रेस काफी उद्वेलित है। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता जयराम रमेश, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित दर्जनों कांग्रेसी विधायक तथा स्थानीय नेता वन कटाई व उद्योग स्थापना के लिए बीजेपी सरकार को घेरने में लगे हैं। विगत दिनों पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मीडिया द्वारा पूछे गये एक सवाल के जवाब में कहा था कि उनकी सरकार की कोई भूमिका नहीं रही है वरन कोल ब्लॉक आबंटन और उद्योग स्थापना की स्वीकृत हेतु केंद्र सरकार जिम्मेदार है। मुड़ागांव में उन्होंने 20 से अधिक कांग्रेस विधायकों के साथ एक जंगी सभा की। सभा में कांग्रेस नेताओं ने मीडिया व आम जनता के सामने कहा कि भूपेश सरकार ने जनसुनवाई को रद्द कर दिया था। जबकि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा 16 अक्टूबर 2019 को भारत सरकार के पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव को जो पत्र भेजा गया था, इससे स्पष्ट होता है कि भूपेश बघेल सहित प्रदेश कांग्रेस के नेतागण सरासर झूठ बोल रहे हैं। इस पत्र क्रमांक 6246 / TS/ CECB/2019 में यह साफ उल्लेखित है कि 27 सितम्बर 2019 को जनसुनवाई पूर्ण की गयी, जिसमें जनता की ओर से 48 लोगों ने अपना पक्ष रखा तथा जनसुनवाई में सब कुछ नियमानुसार सम्पन्न किया गया। इस प्रतिवेदन में सचिव, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल सहित तत्कालीन क्षेत्रीय अधिकारी आर.के.शर्मा व अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी के रूप में आर.ए.कुरुवंशी ने बाकायदा हस्ताक्षर किया है।



इसी प्रकार 28 दिसम्बर 2022 को प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, छत्तीसगढ़ के कार्यालय से पत्र क्रमांक क्र./भू-प्रबन्ध/खनिज/331-245/3063 जारी किया गया। इसमें तत्कालीन अधिकारी सुनील मिश्रा के हस्ताक्षर से बाकायदा फारेस्ट क्लियरेंस की अनुशंसा की गयी है। इन दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के बाद कांग्रेस बेकफुट पर आ गयी है उसके जिम्मेदार नेताओं के बयानों की पोल खुल गयी है और कांग्रेस के विरुद्ध भाजपा सांसद राधेश्याम राठिया के सवालों को प्रमाणिकता के साथ बल मिल गया है।



पार्टियों के आरोप-प्रत्यारोप के मकड़जाल में हकीकत की तहकीकात में तहतक की बात करें तो राजनेता आम जनता को न केवल मूर्ख समझते हैं, बल्कि सार्वजनिक मंच पर सफेद झूठ बोलकर जनता-जनार्दन को बेवकूफ बनाते फिरते हैं। झूठ-फरेब और छल-कपट इनके राजनीति के अहम् हिस्सा बन गये हैं। छत्तीसगढ़ की भोली-भाली आदिवासी जनता इनकी चिकनी-चुपड़ी बातों में आकर अपने पुरखों की कमाई जल-जंगल-जमीन से दूर होते जा रहे हैं। भले ही क्यों न इनको विशेष आरक्षण प्राप्त हो, कानून में इनकी जमीन को कोई दूसरा खरीद नहीं सकता, किन्तु यहाँ तो मसला ही कुछ और है। आदिवासियों को उनकी सहमति के बिना जंगल और जमीन से बेदखल किया जा रहा है।

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