जनता लगाए एक पेड़ माँ के नाम और अडाणी कटवाए हजारों पेड़ खदान के नाम

💥पेड़ नहीं पैर पर मार रहे कुल्हाड़ी।

💥कटता जंगल एक अमंगल।

💥विकास के नाम पर हजारों पेड़ हुए धराशायी।

तहतक न्यूज/तमनार-रायगढ़, छत्तीसगढ़।
पेड़-पौधों के संरक्षण के लिए देश ही नहीं सारा संसार प्रतिवर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाता आ रहा है। हमारे यहाँ भी सभी शासकीय विभागों, स्कूलों, उद्योगों, पंचायतों में मनाया गया और अभी भी 'एक पेड़ माँ के नाम' से पौधरोपण का कार्यक्रम जारी है। मानसून भी आ गया है, बारिश में पौधे भी जल्दी पनपते हैं, कोई फलदार पेड़ के पौधे लगा रहा है तो कोई औषधीय या छायादार वृक्ष का पौधा लगा रहा है, लेकिन छत्तीसगढ़ के जिले रायगढ़ से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसे देख कर हर कोई हैरान और स्तब्ध है।

दरअसल, जिले के तमनार तहसील के ग्राम पंचायत सराईटोला के आश्रित ग्राम मुड़ागांव में अडाणी समूह द्वारा जंगल कटाई शुरू करने से हलचल मच गयी है। स्थानीय लोग जहाँ आपे से बाहर हो गये हैं, वहीं पर्यावरण प्रेमियों में आक्रोश का माहौल है। विडंबना यह है कि यह कटाई उस वक्त शुरू हुई, जब एक दिन पूर्व ही छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी ने तमनार में आम जनता को "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया था। इस विरोधाभास ने जन मानस के मन में कई सवाल पैदा कर दिया है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुड़ागांव में अदानी समूह की एक परियोजना के लिए जंगल की कटाई शुरू की गई है। लोगों के विरोध को देखते हुए यहाँ भारी पुलिस बल की तैनाती की गयी है। विरोध में शामिल लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार एवं पूर्व मंत्री व बीजेपी नेता सत्यानंद राठिया सहित दर्जनों ग्रामीणों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में घने जंगल और वन्य जीवों से भरपूर वन क्षेत्र हैं, जो न केवल पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि स्थानीय आदिवासी समुदायों की आजीविका का भी आधार हैं। ग्रामीणों की मानें तो यहाँ हजारों पेड़ काट दिये गये हैं, जोकि पर्यावरण के साथ-साथ उनकी संस्कृति और आजीविका पर हमला है। ग्रामीणों का आरोप है कि कटाई के लिए उनकी सहमति नहीं ली गई और न ही इसकी पर्याप्त जानकारी दी गई।




25 जून 2025 को तमनार में वित्तमंत्री चौधरी ने "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के तहत लोगों से पर्यावरण संरक्षण की अपील की थी। इस अभियान के तहत उन्होंने पेड़ लगाने और पर्यावरण को बचाये रखने का संदेश दिया था, परन्तु दूसरे ही दिन बाद तमनार के मुड़ागांव के जंगल में वृक्षों की अंधाधुंध कटाई ने मंत्रीजी के कथन और विश्वसनीयता को संदेहास्पद बना दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ सरकार जहाँ पर्यावरण संरक्षण की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जंगलों का विनाश किया जा रहा है। यह दोहरा रवैया ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

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