माँ मनी इंडस्ट्रीज के इंडक्शन फर्नेस में धमाका, चार श्रमिक गंभीर रूप से घायल

💥पूँजीपथरा क्षेत्र में स्थापित उद्योगों के फर्नेस यूनिट में हो रहे विस्फोट।

💥कीड़े-मकोड़ों की तरह मारे जा रहे गरीब मजदूर।

💥श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था में कंपनियों की भारी लापरवाही, संबंधित विभाग कुम्भकर्णी नींद में गाफिल।

तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़।
बिजली और इस्पात की नगरी रायगढ़, जहाँ नित नये उद्योगों की स्थापना में अव्वल है, तो वहीं चल रहे उद्योगों में हादसों का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ रहा है और श्रमिक असमय काल के गाल में समा रहे हैं। एक के बाद एक लगातार हो रहे हादसों के क्रम में बीती रात पूँजीपथरा स्थित माँ मनी इंडस्ट्रीज में इंडक्शन फर्नेस में एकाएक विस्फोट हो जाने से चार श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गये।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सभी श्रमिक अपने-अपने कार्य में लगे थे तभी फर्नेस में अचानक विस्फोट हो गया, धमाका इतना जबरदस्त था कि आसपास मौजूद कई लोग घबरा कर बाहर दौड़ पड़े। चार श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गये। प्लांट में अफरा-तफरी मच गयी। आनन-फानन में घायलों को जिंदल फोर्टिस हॉस्पिटल ले जाया गया। दो की हालत काफी नाजुक बतायी जा रही है जिन्हें बेहतर उपचार के लिए रायपुर रेफर किया गया है। चारों श्रमिक अनुज कुमार (35) संजय श्रीवास्तव (52) सुधीर कुमार (47) और रामानंद साहनी (40) बिहार के रहने वाले हैं और ये ठेके पर कार्यरत थे।हाई टेक के इस जमाने में छत्तीसगढ़ के औद्योगिक शहर रायगढ़ में एक बार फिर फैक्ट्री सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।




उल्लेखनीय है कि अभी हाल ही में शिवा उद्योग के फर्नेस में हुए विस्फोट से एक श्रमिक की जान चली गयी, बताया गया कि वहाँ पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। इसी तरह देलारी स्थित एनआर इस्पात में 35 फीट की ऊँचाई से गिर कर एक इलेक्ट्रीशियन की मौत हो गयी, यहाँ भी सुरक्षा साधनों की कमी पायी गयी। इस प्रकार देखा जाय तो पूँजीपथरा क्षेत्र में स्थापित उद्योगों में श्रमिकों की सुरक्षा के लिए कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। श्रम विभाग हो या औद्योगिक सुरक्षा विभाग घटना होने पर केवल कागजी खानापूर्ति कर अपने कर्तव्यों से इतिश्री कर लेते हैं। उद्योगों में सुरक्षा को लेकर निरंतर जाँच-पड़ताल होती तो इस प्रकार के हादसे आये दिन नहीं होते। गरीबी और बेकारी की मार झेल रहे हजारों श्रमिक अपनी जान जोखिम में डालकर बिना किसी सुरक्षा उपकरणों के यहाँ काम करने को मजबूर हैं। उन्हें डर है कि कुछ भी बोलेंगे तो काम से निकाल दिया जायेगा। दूसरे प्रांतों से आये मजदूर प्लांट में ही रहकर ठेके पर बंधुआ मजदूर की तरह बारह घंटे कार्य कर उद्योगों को फायदा कराते हैं लेकिन धन्य हैं उद्योगपति जो इनकी सुरक्षा का जरा भी ख्याल नहीं रखते। मजदूरों की मौत पर चंद लाख दे कर परिजनों का मुँह बंद कर देते हैं। यही कारण है कि कई उद्योगों में स्थानीय कर्मचारी न रख बाहरी लोगों को प्राथमिकता दिया जाता है।

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