सरकारी अस्पताल में इलाज के नाम पर चल रहा अवैध वसूली का खेल

तहतक न्यूज/लैलूंगा।
जिले का सबसे पिछड़ा इलाका कहा जाने वाला आदिवासी क्षेत्र लैलूंगा अब ऐसा लगता है जैसे जिले के अन्य विकासखंडों से विकास की दौड़ में सबसे आगे चल रहा है। क्षेत्र के आम निवासी इतने धन संपन्न हो गये हैं कि सरकारी अस्पताल में जहाँ मुफ्त इलाज होता है वहाँ पैसे दे कर इलाज करवा रहे हैं। इसकी बानगी लैलूंगा उप स्वास्थ्य केंद्र में देखने को मिल रही है जहाँ इलाज के नाम पर अवैध वसूली का गोरखधंधा पनप रहा है।

लैलूंगा विधानसभा के विकासखंड लैलूंगा स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों व उनके परिजनों से इलाज और दवाओं के एवज में अवैध वसूली की खबर आ रही है। बताया जा रहा है कि स्वास्थ्यकर्मी रीतेश पटेल द्वारा रेबीज इंजेक्शन के नाम पर मरीजों से 1000 रु. से 3000 रु.तक वसूला जा रहा है, जबकि शासकीय अस्पतालों में यह इंजेक्शन निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है।
आपको बता दें कि पहले भी रीतेश पटेल पर अवैध वसूली के आरोप लग चुके हैं, परन्तु स्वास्थ्य विभाग की खामोशी से वरदहस्त प्राप्त इस कर्मचारी के हौसले और बढ़ गये हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो जब मरीज पैसे नहीं दे पाते हैं तो उन्हें धमका कर भगा दिया जाता है।



लैलूंगा में अस्पताल कर्मचारी ही नहीं, अपितु शव वाहन चालक भी परिजनों के मजबूरी का नाजायज फायदा उठा रहे हैं। हादसे या अन्य कारणवश मृत हुए शरीर को घर ले जाने के लिए 3000 से 5000 रूपये तक की माँग की जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में इस प्रकार का भ्रष्टाचार लम्बे समय से चल रहा है किन्तु स्वास्थ्य विभाग और इन भ्रष्टाचारियों की मिलीभगत से कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। पीड़ित परिजनों और जनता ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से ठोस कदम उठाये जाने की माँग की है।

क्षेत्र में आम जनता के साथ चल रहे इस प्रकार के घिनौने कृत्य के तह तक की बातें करे तो चाँदी के जूतों की चमक के आगे हर कोई नतमस्तक है। नीचे से लेकर ऊपर तक भ्रष्टाचार सिर चढ़ कर बोल रहा है। जिम्मेदार अधिकारी जहाँ खामोशी की चादर ओढ़े बैठे हैं तो वहीं अपने आपको जनता के हितैषी कहलाने वाले नेतागण, अध्यक्ष, मंत्री, विधायक सभी मौनव्रत धारण किये नजर आ रहे हैं। सवाल उठता है कि निरीह जनता आखिर ऐसे कब तक छली जाती रहेगी?

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