
तहतक न्यूज/रायगढ़।
प्रदूषण से त्रस्त जिले वासियों के लिए राहत भरी एक बड़ी खबर निकल कर सामने आयी है। आपको बता दें कि जिला कलेक्टर कार्तिकेय गोयल के निर्देशानुसार कच्चे माल, उत्पाद, अपशिष्ट परिवहन करने वाले वाहनों के द्वारा नियमों के पालन की जांच हेतु संयुक्त जांच दल गठित की गई है जिनके माध्यम से 15 से 21 फरवरी तक रायगढ़ से चन्द्रपुर, कोडातराई, हमीरपुर, ढिमरापुर, तमनार, घरघोड़ा, पलगड़ा सहित विभिन्न स्थानों पर परिवहनकर्ता वाहनों की सघन जांच की गई जिसमें पर्यावरण विभाग रायगढ़ द्वारा क्षतिग्रस्त वाहन द्वारा परिवहन करने, ट्रॉली में 05 से.मी. फ्री बोर्ड स्पेस नहीं होने, संबंधित नोडल का नाम वाहन पर नहीं होने एवं समुचित रूप से तारपोलिन से ढके बिना, कच्चे माल,उत्पाद, एवं अपशिष्ट परिवहन करने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के रूप में 10,51,850 रुपये अधिरोपित की गई।

प्रशासन की इस कार्रवाई से जहाँ ट्रांसपोर्टर और उद्योग प्रबंधनों में खलबली मच गयी है वहीं जिले वासियों को थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है। सड़कों पर धूल-गर्दे उड़ाने वालों पर जिस तरह कार्रवाई हुई उसी तरह पूरे वातावरण में चौबीसों घंटे फ्लाई ऐश उड़ाने वाले उद्योगों पर भी कार्रवाई हो तो आसपास रहने वाले स्थानीय ग्रामीणों की उम्र शायद कुछ बढ़ जाय।

उल्लेखनीय है कि ग्राम लाखा (गेरवानी) के समीप स्थापित उद्योगों द्वारा अंधेरा होते ही रात में फिल्टर डिवाइस बंद कर भारी मात्रा में डस्ट छोड़ा जा रहा है जिससे लोगों को साँस लेने में परेशानी हो रही है। सर्दी, खाँसी तो हमेशा लगी रहती है, काले डस्ट से बच्चों और महिलाओं की एड़ियाँ भी फट रही हैं।

सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि उद्योग प्रबंधनों की मनमानी और लापरवाही से स्थानीय लोग किस तरह से नारकीय जीवन जीने को विवश हैं। निरीह ग्रामीणों के मन में यही सवाल बार-बार उठ रहा है कि आखिर इन उद्योगों की गलतियों का खामियाजा हमें क्यों भुगतना पड़ रहा है? कब हम खुली हवा में साँस ले पाएंगे? हमने जब सरकार बनाया है तो सरकार को हमारी चिंता क्यों नहीं है? हम जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हमारे विधायक, हमारे सांसद, हमारे पर्यावरण मंत्री आखिर कहाँ नदारद हो गये हैं? ये कैसी विडंबना है कि लैलूंगा विधानसभा क्षेत्र की विधायक एक महिला हैं और उन्हीं के विधायकी में महिलाएं हलाकान,परेशान और बेबस नजर आ रहीं हैं?