केलो पार्क में आगंतुकों से तगड़ी वसूली फिर भी अव्यवस्था का आलम

💥करोड़ों के केलो पार्क में मवेशी और अवारा कुत्तों का जमघट।

💥नहीं कोई सुरक्षा व्यवस्था न ही कोई साफ-सफाई।

तहतक न्यूज/रायगढ़।
आधुनिक जीवन शैली में रोज-रोज की भाग-दौड़ से जब मन उकता जाता है तो इंसान प्रकृति के हरे-भरे खूबसूरत मनोरम वादियों की ओर बरबस ही खिंचा चला जाता है। ऐसा ही एक खूबसूरत पिकनिक स्पॉट है केलो पार्क जोकि रायगढ़-घरघोड़ा मुख्य मार्ग से लगा हुआ है। छुट्टी के दिनों में सुबह से शाम तक यहाँ लोगों की काफी भीड़ लगी रहती है।


बता दें कि इस पार्क को बनाने और सजाने के लिए प्रशासन द्वारा लाखों-करोड़ों रूपये खर्च किये गये हैं किन्तु सफाई और सुरक्षा व्यवस्था के लिए कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पार्क में पिकनिक मनाने वालों के लिए एक अलग जगह बनाया गया है जहाँ खाना बनाने के चूल्हा, पीने के पानी की टंकी, टायलेट आदि की भी व्यवस्था है जिसके लिए 250 रूपये पिकनिक शुल्क लिया जाता है लेकिन यहाँ की साफ-सफाई और सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। अवारा मवेशी और कुत्ते डटे रहते हैं। लोग जब खाना खाने बैठते हैं तो यही जानवर खाने के लालच में इर्द-गिर्द घूमते रहते हैं और परेशान करते हैं। कभी-कभी तो खाने के बर्तन में ही मुँह डाल देते हैं जिससे पूरा खाना बेकार हो जाता है। यहाँ के कर्मचारी टिकट काट कर या तो कुर्सी में बैठे उँघते रहते हैं या फिर मोबाईल में गड़े रहते हैं। लोग गाय, बैलों और कुत्तों को भगा-भगा कर थक जाते हैं लेकिन इनके कानों पर जूँ तक नहीं रेंगती। कहने पर यही जवाब दिया जाता है कि यहाँ का घेराव कई जगह से टूट गया है जिसके चलते मवेशी घुस जाते हैं। हम क्या करें? अधिकारियों को बताने पर कहते हैं कि ऊपर से कोई फंड नहीं आता। पहले तो यहाँ सिक्योरिटी गार्ड भी दिया जाता था।

सुरक्षा की बात करें तो इस असुरक्षित पिकनिक स्थल पर दीमक की बांबी और सांप के बिल भी मौजूद हैं जिससे लोगों को जान का खतरा बना रहता है उल्लेखनीय है कि यहाँ महिलाओं के साथ छोटे-छोटे बच्चे भी आये रहते हैं और यहाँ खेलते रहते हैं, यदि कहीं कुछ हादसा हो जाय तो कौन होगा इसका जिम्मेदार?

अब सवाल उठता है कि जब यहाँ के मेंटेनेंस के नाम पर आम जनता से जो इतना भारी-भरकम शुल्क लिया जा रहा है तो अव्यवस्था की स्थिति क्यों है? शुल्क के रूप में ली जाने वाली राशि आखिर जाती कहाँ है?
जहाँ कदम-कदम पर जनता अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा टैक्स के रूप में दे रही है वहीं सुविधा के नाम पर परिणाम जीरो बटे सन्नाटा हो तो यह बड़ी गंभीर बात है। संबंधित विभाग के अधिकारियों को इसे संज्ञान में लेने की आवश्यकता है।

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