प्रदूषण फैलाने से बाज नहीं आ रहे उद्योग…नोटिस नहीं!कार्यवाही की है जरुरत..।

तहतक न्यूज/शनिवार/14सितम्बर 2024 रायगढ़।
प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के लिए बरसात का मौसम किसी स्वर्णिम काल से कम नहीं होता। साँझ ढलते ही ईएसपी (प्रदूषण रोधी यन्त्र) को बन्द कर दिया जाता है और बड़ी मात्रा में फ्लाई ऐश को चिमनी के द्वारा छोड़ दिया जाता है जिससे आस-पास के पेड़-पौधों और घरों के छत पर फ्लाई ऐश बैठ जाता है लेकिन बारिश होने पर धुल जाता है और बह कर नदी-नालों में चला जाता है। इस प्रकार उद्योगों के लिए मुसीबत बना फ्लाई ऐश भारी मात्रा में बिना किसी व्यय के उड़ कर बरसात के पानी में मिल कर नदी-नालों में बह जाता है जोकि दिखाई भी नहीं देता। जिले में लापरवाह हो चुके उद्योग प्रबंधन पर्यावरण नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ा रहे हैं और पर्यावरण विभाग आँखे मुंदे कुम्भकर्णी नींद में खामोश बैठा है l वायु प्रदूषण हो या ध्वनि प्रदूषण यह तो रायगढ़ जिले के लिए आम बात हो गयी है लेकिन अब जल प्रदूषण की भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। रायगढ़ शहर की लाइफ लाइन माने जाने वाली केलो नदी भी उद्योगो के आपशिष्ट से दूषित हो रही है तथा नगर वासियों को यही गंदा पानी नगर निगम द्वारा पेयजल सप्लाई किया जा रहा है।


वास्तविक तथ्यों की बात करें तो प्रदूषण फैलाने पर प्रशासन द्वारा केवल नोटिस देकर अपने कर्त्तव्यों से इतिश्री कर ली जाती है और पीड़ित आम जन इसी भ्रम में रह जाते हैं कि कार्यवाही हो रही है जबकि नतीजा वही ढाक के तीन पात। कुल मिलाकर यह नोटिस का खेल महज एक दिखावा बनकर रह गया है। उद्योग प्रबंधनों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच चल रही मिलीभगत का यह खेल आम जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। सबसे बड़ी विडंबना है कि पर्यावरण विभाग के मंत्री भी रायगढ़ जिले से है बावजूद इसके प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगो के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है l


हाल ही में केलो नदी में उद्योगों से उत्सर्जित होने वाले अपशिष्टों से प्रदूषित होने पर ई.ई. सिंचाई विभाग,रायगढ़ ने बी.एस. स्पंज, सिंघल इंटरप्राइजेज, सुनील स्पंज, अंजनी स्टील और सिंघल इनर्जी को नोटिस जारी किया है और कहा है कि 15 दिवस के अंदर शपथ पत्र प्रस्तुत करें और यदि निरीक्षण के दौरान प्रदूषित अपशिष्ट नदी नालों में बहता पाया गया तो कार्यवाही के लिय स्वयं जिम्मेदार होंगे लेकिन 15 दिन तो क्या 45 दिन गुजर गये कोई ठोस कार्यवाही नजर नहीं आ रही। केलो नदी को प्रदूषित करने वाले उद्योगो के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय विभाग केवल नोटिस थमा कर जनता-जनार्दन को गुमराह करने का कार्य कर रहा है।

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