गजराजों की बढ़ती धमक और बेबस होता वन विभाग

तहतक न्यूज/रविवार/11अगस्त 2024/रायगढ़
जंगली हाथियों का मानव आबादी की ओर बढ़ता कदम, एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। आये दिन हाथियों के उत्पात की खबरें सुर्खियों में लगातार देखने व सुनने को मिल रही हैं। खबर है कि रायगढ़ वन परिक्षेत्र के बंगुरसिया सर्किल में 15 से 20 हाथी विचरण कर रहे हैं। हाल के दिनों में तेज बारिश के दौरान ढाई घंटे तक सड़क किनारे खड़े रहे जिससे सड़क पर वाहनों की आवा-जाही बन्द हो गयी थी।


इसी तरह एक हाथी बंगुरसिया अस्पताल पहुँच गया तो वहीं दो हाथी धानमंडी पहुँच गये थे जिससे ग्रामवासियों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
जशपुर क्षेत्र में भी जंगली हाथियों ने ऊधम मचा रखा है। एक जंगली दंतैल ने चार लोगों को मौत के घाट उतार दिया जिसमें एक ही परिवार के तीन लोग थे। नगर पंचायत बगीचा के वार्ड क्रमांक 09 गम्हरिया में एक घर को ढहा कर अंदर घुस कर पिता, पुत्री व चाचा सहित एक पडोसी युवक को अपने पैरों तले कुचल कर मार डाला।


ग्यारह हाथियों का एक दल धरमजयगढ़ से कुदमुरा रेंज में पहुँच गया है जहाँ करतला वन परिक्षेत्र के कलगामार, खोडरी व खैर भौना में तीन महिलाओं को मौत की नींद सुला दिया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार हाथियों का यह दल पंतोरा के छाता जंगल में डेरा डाले हुए है। आपको बता दें कि यह अपने नाम के अनुरूप बेहद घनघोर जंगल है।


कटघोरा वन मंडल की बात करें तो यहाँ भी जटगा, पसान, एतमा नगर व केंदाई रेंज में इनकी सक्रियता बनी हुई है। जटगा रेंज के मुकुवा जंगल में दस हाथी करीब एक माह से जमे हुए हैं जबकि केंदाई रेंज के कापा नवापारा में बीस हाथी तथा एतमा नगर के गुरसिया में चौबीस हाथी स्वछन्द घूम रहे हैं।


हाथी-मानव द्वन्द की वास्तविकता में तह तक जाकर अवलोकन किया जाय तो जो हकीकत सामने आ रही है उससे यही प्रतीत होता है कि इस युद्ध को रोक पाने में वन विभाग पूरी तरह से लाचार और बेबस नजर आ रहा है। मुआयना और क्षति के मुआवजे बनाने के सिवा कुछ नहीं कर पा रहा है। जंगली हाथी रिहायशी इलाकों में क्यों दस्तक दे रहे हैं इसे सभी जान रहे हैं फिर भी मूक दर्शक बने बैठे हैं। बचाव को लेकर इस पर कोई सार्थक पहल या कोई ठोस विचार मंथन कर कोई ऐसे उपाय करने होंगे जिससे हाथी और मानव दोनों सुरक्षित रहें। प्रकृति के अंधाधुंध दोहन से धरती का संतुलन कितना बिगड़ रहा है इसे वन्य जीव भली-भांति समझ रहे हैं परन्तु इंसान नहीं समझ पा रहा। बहरहाल आम जनता सरकार पर भरोसा छोड़ अपने स्तर पर इस मुसीबत से बचने के उपाय ढूंढती हुई हाथ मलती और सिर धुनती नजर आ रही है।

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