बी.एस.स्पंज की नींदें उड़ी, परियोजना की जनसुनवाई को लेकर क्षेत्र ही नहीं पूरे जिले में भारी विरोध के आसार

💥1,755 करोड़ की बी.एस.स्पंज परियोजना से पर्यावरण पर गहराये संकट के बादल।

तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। विकास के नाम पर नवापारा (टेंडा) में प्रस्तावित विशाल स्टील प्लांट पर जनसुनवाई से पहले गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व से ही औद्योगिक प्रदूषण की मार झेल रहे रायगढ़ को एक और भारी उद्योग का बोझ कितना भारी पड़ेगा? यह सवाल क्षेत्र वासियों के लिए बड़े ही दुख और गहरी चिंता का विषय बन गया है। यही वजह है कि प्रभावित क्षेत्र के न केवल ग्रामीण खिलाफत कर रहे हैं बल्कि, शहर वासी भी पुरजोर विरोध कर रहे हैं। यही नहीं, छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ, घरघोड़ा इकाई ने भी बुधवार को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं एसडीएम, घरघोड़ा को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन के माध्यम से बी.एस. कंपनी की 28 सितंबर को प्रस्तावित जनसुनवाई को रद्द करने की मांग की गई है।
         विदित हो कि कंपनी के पर्यावरणीय दस्तावेज के अनुसार प्रस्तावित परियोजना के लिए लगभग 35.37 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है और परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1,755 करोड़ रुपये बताई गई है। प्रस्ताव में स्पंज आयरन, स्टील बिलेट, टीएमटी बार, वायर रॉड, रोलिंग मिल, फेरो एलॉय, कोल गैसीफायर, कोयला वॉशरी और विद्युत उत्पादन से संबंधित इकाइयों का प्रावधान किया गया है। दस्तावेज में डीआरआई फर्नेस की कुल क्षमता 8,58,000 टीपीए, इंडक्शन फर्नेस के माध्यम से स्टील उत्पादन 7,92,000 टीपीए, इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस के माध्यम से करीब 3,30,000 टीपीए, रोलिंग मिल से 7,92,000 टीपीए तथा कोल वॉशरी की क्षमता 22,50,000 टीपीए बताई गई है। इसके अलावा फेरो एलॉय और अन्य औद्योगिक उत्पादन इकाइयों की भी बड़ी क्षमताएं प्रस्तावित हैं। परियोजना का वास्तविक स्वरूप एक बहु-इकाई भारी औद्योगिक परिसर का है, जिसका पर्यावरणीय प्रभाव भी उसी अनुपात में व्यापक होने की आशंका है।
       ऐसे में प्रदूषण का प्रकोप आसपास के इलाकों में और अधिक भयंकर होगा। लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने से सड़कें खराब होंगीं और दुर्घटनाओं में बेकसूर लोग बेमौत मारे जायेंगे। चोरी, डकैती, मारपीट, लूटपाट, हत्या जैसी गंभीर अपराधों की संभावनाएं बढ़ेंगीं। पहले से स्थापित उद्योगों के प्रदूषण से हलाकान लोग जैसे-तैसे व्यवस्था कर गुजर-बसर कर रहे हैं वहीं इस इस विशाल परियोजना के विस्तार उनका जीवन और अधिक नारकीय हो सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्लांट चालू हो जाने के बाद उद्योग प्रबंधन पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों एवं अन्य नियम व शर्तों का खुला उल्लंघन करते हुए मनमानी पर उतर आते हैं।
        बहरहाल, जिले में बढ़ते प्रदूषण और उसके खतरनाक नतीजों को देखते हुए ग्रामीणजन अब आर-पार की लड़ाई लड़ने को मजबूर नजर आ रहे हैं। गाँव की गलियों में ही नहीं वरन शहर के चौक-चौराहों में भी बी.एस. स्पंज परियोजना की जनसुनवाई और उसके कड़े विरोध की गरमागरम बहस की तस्वीरें दिखायी दे रही हैं। वहीं, कंपनी के नुमाइंदे भी लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष अपने पक्ष में लेने की कोशिश में जुटे हैं।

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