तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। जिले में स्थापित उद्योगों में श्रमिकों के मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ग्राम पंचायत लाखा के आश्रित ग्राम चिराईपानी स्थित महालक्ष्मी कास्टिंग में हुए एक दर्दनाक हादसे में एक गरीब परिवार के मुखिया की जान चली गयी। दरअसल, महालक्ष्मी कास्टिंग के शीट में चढ़कर फेब्रिकेशन का काम करने के दौरान करीब 35 फीट की ऊंचाई से गिर कर एक कामगार गंभीर रूप से घायल हो गया। आनन-फानन में उसे अस्पताल लाया गया जहाँ उपचार के दौरान उसकी जिंदगी खत्म हो गई। भले ही यह घटना कल हुई है, किन्तु आज पुलिस को भनक लगते ही इसकी जांच शुरू हो गई है

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय से 13 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत लाखा के आश्रित ग्राम चिराईपानी में महालक्ष्मी कास्टिंग्स प्रायवेट लिमिटेड में बीते बुधवार सुबह लगभग साढ़े दस बजे एक ऐसी घटना घटी, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियों को हमेशा के लिए गम में बदल दिया। मूलतः उत्तरप्रदेश के बागपत जिले का उत्तरा निवासी मीर हसन वल्द समीदीन (50 वर्ष) महालक्ष्मी कास्टिंग्स परिसर के लेबर क्वाटर में रहते हुए कंपनी में ही किसी शाहिद ठेकेदार के मातहत काम करता था।
बीते 15 अप्रैल को सुबह साढ़े दस बजे महालक्ष्मी कास्टिंग्स परिसर स्थित लगभग 35 फीट ऊपर शीट में चढ़कर मीर हसन फेब्रिकेशन कार्य कर रहा था। इसी बीच अचानक उसका शारीरिक संतुलन बिगड़ गया और नीचे आ गिरा। उसकी चीख सुनकर आसपास काम कर रहे लोगों की रूह तक कांप गयी। इस हौलनाक हादसे को देखते ही बदहवास कामगारों ने इसकी सूचना कंपनी प्रबंधन को दी तो आनन-फानन में उसे रायगढ़ के आरएल हॉस्पिटल में दाखिल कराया गया।
डॉ. प्रशांत अग्रवाल ने प्राथमिक जांच में पाया कि मीर हसन के सिर, हाथ-पांव के अलावा शरीर के अन्य भाग भी चोटिल थे, लिहाजा सघन उपचार शुरू हुआ। बावजूद इसके चंद घंटे तक जिंदगी और मृत्यु के बीच सांसें लेने वाले मीर हसन ने शाम 4 बजे दम तोड़ दिया। वहीं, यूपी के मीर हसन के शव को जब जिला चिकित्सालय लाया गया, तब कहीं जाकर गुरुवार को मामले का खुलासा हुआ।
उद्योगों में बार-बार हो रही मजदूरों की मौत से जहाँ कई सवाल उठने लगे हैं, वहीं उद्योग प्रबंधनों द्वारा ऐसी घटनाओं को छिपाये जाने की असफल कोशिश भी कहीं न कहीं इनकी लापरवाही को दर्शाता है। आपको बता दें कि महालक्ष्मी कास्टिंग में बुधवार को हादसा हुआ, मगर किसी को कानों कान खबर तक नहीं लगने दिया गया। वहीं, जब मीर हसन की मौत हुई और शव को पोस्टमार्टम के लिए केजीएच लाया गया, तो कई सवाल भी उठने लगे। आशंका है कि महालक्ष्मी कास्टिंग्स में सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के चलते मीर हसन को जान से हाथ धोना पड़ा, यदि फेब्रिकेशन कार्य के दौरान वास्तव में उसे हेलमेट और सुरक्षा के लिए सेफ्टी बेल्ट जैसे अन्य संसाधन दिए गए होते तो शायद मीर हसन की जान बच सकती थी। बहरहाल, पोस्टमार्टम की कार्रवाई करते हुए पुलिस अब दुर्घटना की असलियत जानने में जुटी है।
बात करें तहतक की तो कहते हैं न कि ‘पैसा बोलता है’ पैसों से क्या कुछ नहीं खरीदा जा सकता इसकी बानगी जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के दौरान देखने को मिली। जब तहतक न्यूज की टीम वहाँ उपस्थित परिजनों से बात करनी चाही तो यह कहते हुए दुरी बना ली गयी कि पोस्टमार्टम करवाकर जल्दी जाना है हमें कोई शिकायत नहीं करनी है। अब आप समझ सकते हैं कि किस तरह से यहाँ सबको मैनेज कर पूरे मामले पर पर्दा डालने की पूरी कोशिश की गयी है। यही कारण है कि उद्योगों में स्थानीय लोगों के बजाय बाहरी लोगों को ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है। यही मृतक लोकल होता तो न केवल बवाल होता, अपितु मुआवजे को लेकर कंपनी प्रबंधन के हाथ-पाँव फुल गए होते।
