
तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़।
एक समय था जब बोलने का मजा ही कुछ और था। बोलने वाला तो मजे लेता था, सुनने वाला भी मगन हो कर आनंद लेता था, लेकिन आज के समानता और बहुमत के दौर में बेबाकी किसी बवाल से कम नहीं है। बेहतर होगा कि कुछ भी बोलने से पहले सौ बार सोच लिया जाय या फिर मौनव्रत धारण कर लेना चाहिए।
पिछले कुछ समय से सामाजिक आरोप-प्रत्यारोप, क्षेत्रवाद,जातिवाद सम्बन्धी बवालों की बाढ़ सी आ गयी है। जो जैसे पा रहा है बिना सोचे-समझे बोले जा रहा है और शांत वातावरण में आये दिन सभा, रैली, धरना प्रदर्शन और विरोध के माहौल पैदा कर रहे हैं, जोकि मानव समाज व देश की सुख, शांति और समृद्धि के लिए खतरनाक संकेत है। ऐसा ही एक और मामला सामने आया है, जिसमें एक आईएएस अधिकारी के बड़बोलेपन ने ब्राह्मण समाज को आहत किया है।
बता दें कि मध्यप्रदेश के आईएएस अधिकारी एवं अजाक्स संघ के अध्यक्ष संतोष वर्मा द्वारा ब्राम्हण समाज की बेटियों पर की गई अभद्र एवं अमर्यादित टिप्पणी के विरोध में जिला उत्कल ब्राम्हण विकास संगठन एवं कल्याण समिति रायगढ़ ने पुलिस अधीक्षक रायगढ़ को ज्ञापन सौंपकर कड़ी कार्यवाही की मांग की।

ज्ञापन में बताया गया कि दिनांक 23 नवंबर 2025 को प्रांतीय अधिवेशन के दौरान संतोष वर्मा ने कहा—
“आरक्षण समाप्त हो जाएगा, अगर ब्राम्हण अपनी बेटी दान करें”
संगठन ने इस वक्तव्य को ब्राम्हण समाज की बेटियों का अपमान, सामाजिक सौहार्द को ठेस पहुंचाने वाला तथा पद की मर्यादा का गंभीर उल्लंघन बताया।
संगठन ने यह भी कहा कि इस प्रकार का बयान एक जिम्मेदार आईएएस अधिकारी के कर्तव्य, सिविल सेवा आचरण संहिता और सामाजिक गरिमा का स्पष्ट उल्लंघन है, जिससे पूरे देश में रोष फैल गया है और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा विरोध दर्ज कराया जा रहा है।

ज्ञापन में मांग की गई कि सामाजिक सौहार्द्र भंग करने,जातिगत टिप्पणी करने तथा एक समुदाय की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने जैसे गंभीर आरोपों पर संतोष वर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की उपयुक्त धाराओं में अपराध दर्ज किया जाए।
इस दौरान अध्यक्ष अरुण पंडा, सचिव अशोक पंडा, तथा रायगढ़ तहसील अध्यक्ष चित्रसेन शर्मा,पुसौर तहसील अध्यक्ष अक्षय सतपथी, कीर्तिचंद्र आचार्य, संतोष होता, दिनेश शर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी, ब्रजकिशोर शर्मा, गौतम आचार्य, दीपक आचार्य, अजय मिश्रा, प्रशांत शर्मा, दुर्गेश शर्मा, सत्यम पंडा समेत समाज के दर्जनों सदस्य उपस्थित रहे।
