तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। औद्योगिक नगरी के रूप में तेजी से आकार लेते रायगढ़ के पीछे साये की तरह पड़ा प्रदूषण भी अब भयानक रूप से प्रकट होने लगा है। पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों में कंपनियों की मनमाना पूर्ण लापरवाही और तानाशाही रवैये से अनियंत्रित होते प्रदूषण को लेकर प्रभावित ग्रामीण व किसान ही नहीं पूरे जिले के आम नागरिक भी त्रस्त हैं। यही कारण है कि अब किसी भी उद्योग की स्थापना या विस्तार को लेकर लोग विरोध करने पर मजबूर हो गए हैं।
ज्ञात हो कि बी.एस.स्पंज कंपनी की प्रस्तावित लगभग 1,755 करोड़ रुपये लागत की परियोजना के लिए करीब 35.37 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है। प्रस्ताव में स्पंज आयरन, स्टील बिलेट, टीएमटी बार, वायर रॉड, रोलिंग मिल, फेरो एलॉय, कोल गैसीफायर, कोयला वॉशरी और विद्युत उत्पादन से संबंधित इकाइयों का प्रावधान किया गया है। दस्तावेज में डीआरआई फर्नेस की कुल क्षमता 8,58,000 टीपीए, इंडक्शन फर्नेस के माध्यम से स्टील उत्पादन 7,92,000 टीपीए, इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस के माध्यम से करीब 3,30,000 टीपीए, रोलिंग मिल से 7,92,000 टीपीए तथा कोल वॉशरी की क्षमता 22,50,000 टीपीए बताई गई है। इसके अलावा फेरो एलॉय और अन्य औद्योगिक उत्पादन इकाइयों की भी बड़ी क्षमताएं प्रस्तावित हैं। इस प्रकार एक विशाल स्टील प्लांट खुलने जा रहा है। जिले में पूर्व से संचालित उद्योगों से होने वाले प्रदूषण और इसके दुष्परिणाम से हर कोई परिचित है। ऐसे में इतने बड़े भारी उद्योग के चालू होने से प्रदूषण का स्तर और कितना भयानक होगा? कोई भी समझ सकता है। यही वजह है कि बी.एस.स्पंज कंपनी की 28 सितम्बर को होने वाली जनसुनवाई को लेकर ग्राम नावापारा (टेंडा) और चारमार सहित आसपास क्षेत्र के दर्जनों गाँव के लोगों में दहशत और आक्रोश का माहौल है। न तो किसान अपनी जमीन देने को तैयार हैं और ना ही ग्रामीण समर्थन देने को राजी हैं। ऐसी विनाशकारी विकास की परिभाषा सब समझने लगे हैं।
बहरहाल, गाँव के गली-मोहल्लों में उड़ती खबरों के अनुसार विरोध की संभावनाएं प्रबल नजर आ रहीं हैं। वैसे आज पूरी रात बाकि है और बात भी बाकि है। ऊंट किस तरफ करवट बदलता है यह तो आने वाला कल ही बता पायेगा।



