महालक्ष्मी कास्टिंग प्लांट के सामने बीच सड़क पर जल भराव, ग्रामवासियों और राहगीरों में आक्रोश का माहौल



💥बारिश का पानी व मलबा रोकने जमीन मालिक ने बना दी मेड़ तो सड़क बना तालाब।
💥राहगीरों और ग्रामवासियों को आवागमन में हो रही परेशानी।
💥निशाने पर महालक्ष्मी कास्टिंग प्लांट, परिसर में पर्याप्त ड्रेनेज व्यवस्था नहीं होने का आरोप।

तहतक न्यूज/रायगढ़, छत्तीसगढ़। गर्मी के मौसम में जब गर्मी अपने पूरे शबाब पर होती है तो लोग मानसून का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं और जब बारिश होने लगती है तो वही लोग हलाकान होने लगते हैं। जनता और सरकार के बीच शिकायतों के अम्बार लगने शुरू हो जाते हैं। समाधान न होने पर फिर वही विरोध, धरना प्रदर्शन, आंदोलन जैसी नकारात्मक तस्वीरें उभरने लगती हैं, लेकिन परेशानियों से जुड़े दोनों पक्ष यदि आपसी सामंजस्य बिठाकर स्वयं में कोई ठोस निर्णय ले लें तो  समस्या का समाधान निश्चित ही अपने-आप हो जायेगा।
         हम बात कर रहे हैं ग्राम पंचायत लाखा के आश्रित ग्राम चिराईपानी की, जहाँ का मुख्य मार्ग बुरी तरह से जर्जर हो चुका है। वहीं इस मार्ग में स्थापित महालक्ष्मी कास्टिंग प्लांट है, जिसके मेन गेट के ठीक सामने जल भराव की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट परिसर में पर्याप्त ड्रेनेज व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश और प्लांट परिसर का पानी मेन गेट से निकलकर सीधे सड़क पर बह रहा है। इसके चलते मुख्य मार्ग पर पानी भर जा रहा है। इससे आवागमन में ग्रामीणों और राहगीरों को जहाँ परेशानी हो रही है वहीं बची-खुची सड़क भी तेजी से क्षतिग्रस्त हो रही है।
ग्रामीणों के अनुसार सड़क पर कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं। पैदल राहगीरों, स्कूली बच्चों तथा दोपहिया वाहन चालकों को रोजाना जोखिम उठाकर इस मार्ग से गुजरना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ समय पूर्व जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण पानी के दबाव से प्लांट की एक बाउंड्री वॉल गिर गई थी। इस घटना में बाउंड्री वाल से लगे झोपड़ी में रह रहे दो मजदूर गंभीर रूप से घायल और एक गर्भवती महिला मजदूर की मौत हो गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी प्रबंधन ने स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था नहीं बनाई।
        मुख्यमार्ग के बदहाल स्थिति और ग्रामीणों के आवागमन में हो रही परेशानी को लेकर हकीकत की तहकीकात में तहतक की जानकारी लेने जब तहतक न्यूज की टीम मौके पर पहुँची तो जो सच्चाई सामने आयी वो चौंकाने वाली थी। वहाँ जो बातें सामने आयीं उससे यही प्रतीत होता है कि बिना आपसी तालमेल या सामंजस्य के समस्या का हल निकलना नामुमकिन है। मौके पर उपस्थित सम्बंधित उद्योग प्रबंधन से जब तहतक न्यूज ने जल भराव और उसके निराकरण न करने को लेकर सवाल किये तो उन्होंने बताया कि सामने वाले जमीन मालिक ने जेसीबी से सड़क किनारे को पाट कर मेड़ बना दिया है, जिसके कारण बरसात का पानी सीधे जमा होकर सड़क पर बह रहा है। जमीन मालिक का कहना है कि अपनी जमीन पर एक बूंद पानी नहीं जाने देगा। हालाँकि, इससे पहले बरसात का पानी इसी जमीन से होकर निकलता था। प्रबंधन ने यह भी बताया कि बगल में सुनील इस्पात एन्ड पॉवर लिमिटेड है जिसके परिसर का कुछ पानी और हमारे केवल गेट परिसर का ही पानी यहीं से होकर निकलता है। बाकि प्लांट का पानी प्लांट के अंदर ही स्टोर कर लिया जाता है। पानी निकासी के लिए ठोस और पर्याप्त व्यवस्था के सवाल पर प्रबंधन का कहना है कि बरसात का पानी है हम क्या कर सकते हैं? पानी निकलने का रास्ता मिले तो कंपनी मजबूत स्लैब ढाल कर इसे बनाने को तैयार है, लेकिन बनाने नहीं दिया जा रहा है।
          इस प्रकार देखा जाय तो जमीन मालिक और कंपनी प्रबंधन दोनों के बीच तालमेल नहीं बैठ पाने के कारण यहाँ से गुजरने वाली आम जनता और खासकर चिराईपानी वासियों को नाहक परेशानी झेलनी पड़ रही है। ऐसे में यदि शीघ्र ही जलभराव और जर्जर मार्ग की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो प्रशासन एवं संबंधित विभागों को जल्द ही जन आक्रोश व उग्र जन आंदोलन का सामना करना पड़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान सड़क पर दो फीट तक पानी भर जाता है, जिससे किसी भी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। यह आम लोगों की जान से खिलवाड़ है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।
        

बहरहाल, कंपनी ने गड्ढे को स्लेग चूरा पाटकर समतल कर दिया है, किन्तु भारी वाहनों के आवाजाही और पुनः बारिश होने से यह कब तक टिका रह पायेगा? कहना जरा मुश्किल है।

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