तहतक न्यूज/रायगढ़,छत्तीसगढ़। जिले के धरमजयगढ़ वनमंडल के अंतर्गत आने वाले छाल और कापू वन परिक्षेत्र में जंगली हाथियों के अलग-अलग हमलों में दो ग्रामीणों की मौत हो गई है। यह घटना आज 11 जुलाई की सुबह के समय की है। धरमजयगढ़ वनमंडल के छाल और कापू रेंज में हाथियों ने शनिवार तड़के ग्रामीणों पर अलग-अलग हमला किया।

मिली जानकारी के अनुसार, धरमजयगढ़ वन मंडल के कापू वन परिक्षेत्र के तालगांव बस्ती में लोग गहरी नींद सो रहे थे, तभी शनिवार सुबह करीब 4 बजे एक जंगली हाथी घुस आया। हाथी को देखते ही पूरे गांव में भगदड़ का माहौल बन गया। अपनी जान बचाने के लिए ग्रामीण घरों से बाहर निकल कर इधर-उधर भागने लगे। इसी बीच एक महिला भी बदहवास होकर अपनी छोटी सी बच्ची को गोद में लेकर घर से बाहर जैसे ही निकली थी कि उसके सामने मौत खड़ी थी। हाथी ने उस पर अचानक हमला कर दिया और उसे कुचल दिया। इस हमले में जहाँ मौके पर ही महिला की दर्दनाक मौत हो गयी, वहीं उसकी दुधमुंही बच्ची सुरक्षित बच गयी, जो अपनी माँ के शव से लिपटी रोती हुई पायी गयी।
दूसरी घटना छाल रेंज के ग्राम औरानारा की है, जहाँ गांव निवासी बंधन अगरिया (50 वर्ष) सुबह शौच के लिए घर से निकला था। बस्ती के पास मौजूद हाथी ने उस पर एकाएक हमला कर दिया। हमले में गंभीर चोट लगने से उसकी भी मौत हो गई। घटना की सूचना पर पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आगे की कार्रवाई शुरू की।
मौके पर पहुँची वन विभाग की गाड़ी पर भी किया हमला

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। बताया जा रहा है कि हाथी इतना आक्रामक हो चुका था कि गुस्से में आकर वन विभाग की गाड़ी पर भी हमला कर दिया और धक्के मार-मार कर बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया है।
परिजनों को तत्काल आर्थिक सहायता
इस मामले में धरमजयगढ़ वनमंडलाधिकारी ने बताया कि कापू और छाल रेंज में हाथियों के हमले से दो लोगों की मौत हुई है। दोनों मृतकों के परिजनों को तत्काल आर्थिक सहायता राशि प्रदान कर दी गई है।हाथियों की लगातार निगरानी की जा रही है और प्रभावित गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम की माँग
हाथी-मानव द्वन्द में जब भी किसी इंसान की मौत होती है तो चंद लाख का मुआवजा और सतर्क रहने की हिदायत देकर खानापूर्ति कर दी जाती है। बचाव के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। हाथी प्रभावित ग्रामवासी भगवान भरोसे जीवन-यापन करने को मजबूर हैं। ऐसे में लोग वन विभाग से हाथियों पर नियंत्रण और प्रभावित गांवों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग कर रहे हैं।


